जयपुर। पुलिस, एटीएस और एनआईए के अधिकारी बनकर बुजुर्ग डॉक्टर दंपती को आतंकवादी गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने की धमकी देकर 76 लाख रुपए की साइबर ठगी करने के मामले में केंद्रीय साइबर थाना पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी किरण लक्ष्मण ताम्हाणे निवासी पुणे (महाराष्ट्र) को ठाणे से गिरफ्तार कर ट्रांजिट वारंट पर जयपुर लाया गया है। उसके आईसीआईसीआई बैंक खाते में ठगी की रकम में से 50 लाख रुपए आए थे। मामले में अब तक चार आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक साइबर क्राइम विजय कुमार सिंह ने बताया कि मामले में पुलिस तकनीकी साक्ष्यों और बैंक खातों के लेन-देन के आधार पर आरोपियों तक पहुंची। पुलिस के अनुसार जयपुर निवासी डॉक्टर और उनकी पत्नी को व्हाट्सएप कॉल आई। कॉल करने वालों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों और करोड़ों रुपए के वित्तीय अपराध में हुआ है।
आरोपियों ने गिरफ्तारी के साथ परिवार के अन्य सदस्यों पर भी कार्रवाई की धमकी दी। इसके बाद आरोपियों ने व्हाट्सएप पर कथित एनआईए नोटिस भेजा और कुछ दिनों में अनापत्ति प्रमाण-पत्र तथा सुरक्षा प्रमाण-पत्र जारी कराने का झांसा दिया। लगातार वॉइस और वीडियो कॉल के जरिए दंपती पर निगरानी रखी गई और मानसिक दबाव बनाया गया। आरोपियों ने उनसे फिक्स्ड डिपॉजिट की जानकारी और प्रमाण-पत्रों की तस्वीरें भी मंगवाईं। उनके कहे अनुसार दंपती ने अपनी बचत भुनाकर अलग-अलग बैंक खातों में कुल 76 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए।
जांच में पुलिस ने आरोपियों की ओर से इस्तेमाल किए गए व्हाट्सएप और मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल, ग्राहक आवेदन संबंधी जानकारी, इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल और बैंक खातों के रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। बैंक स्टेटमेंट से पता चला कि खाते में आई ठगी की रकम उसी दिन आरटीजीएस के जरिए दूसरे खाते में और अगले दिन फिर किसी अन्य खाते में भेज दी गई।
बैंकिंग रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस पहले दिल्ली और उत्तर प्रदेश से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी थी। आगे की जांच में ठगी की रकम पाने वाले शुरुआती लाभार्थियों में शामिल किरण लक्ष्मण ताम्हाणे तक पुलिस पहुंची।
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसकी कंपनी के.टी. मल्टी सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के आईसीआईसीआई बैंक खाते का साइबर ठगी में इस्तेमाल हुआ था। इस खाते में करीब 50 लाख रुपए आए थे, जिन्हें बाद में अलग-अलग बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया गया।
पुलिस के अनुसार आरोपी ने जिगना प्रथमेश सावंत (राठौड़) और अनुराग माहेश्वरी के साथ मिलकर कंपनी के बैंक खाते की जानकारी, नेट बैंकिंग आईडी-पासवर्ड, चेकबुक और मोबाइल सिम का इस्तेमाल करने दिया। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि रियल एस्टेट में निवेश और मुनाफे पर कमीशन देने का भरोसा दिलाकर उससे बैंक संबंधी विवरण लिए गए थे। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि ठगी की रकम किन-किन खातों में पहुंची और इस नेटवर्क में अन्य कौन लोग शामिल हैं।

















