जयपुर। जिस घर में किसी की कई पीढ़ियां बीत गईं, जिस दुकान से परिवार की रोजी-रोटी चल रही है और जिन मकानों से बच्चों की पढ़ाई का खर्च निकलता है, रविवार को उन्हीं घरों और दुकानों को बचाने के लिए न्यू सांगानेर रोड पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और व्यापारी सड़क पर उतर आए। जेडीए की ओर से सड़क चौड़ीकरण के लिए शुरू की गई डिमार्केशन कार्रवाई के विरोध में लोगों ने सरकार और प्रशासन की प्रतीकात्मक अर्थी निकालकर प्रदर्शन किया।
कई महिलाएं सड़क पर बैठ गईं, जिससे यातायात बाधित हो गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटाने की कोशिश की तो माहौल और गरमा गया। प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय विधायक, जेडीए प्रशासन और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विरोध के दौरान महिलाओं की आंखों में आंसू और व्यापारियों में कार्रवाई को लेकर नाराजगी दिखाई दी।

2.4 किलोमीटर में 260 निर्माण चिह्नित करने की तैयारी
जेडीए एनफोर्समेंट पुलिस अधीक्षक इस्लाम खान के अनुसार राजस्थान हाईकोर्ट की डबल बेंच के निर्णय के तहत सोडाला तिराहे से गुर्जर की थड़ी तक करीब 2.4 किलोमीटर क्षेत्र में डिमार्केशन किया जा रहा है। इसके साथ ही संबंधित लोगों को नोटिस देने की कार्रवाई भी चल रही है। जेडीए के अनुसार करीब 260 निर्माणों को चिह्नित किया जाना है। इसके लिए पांच टीमें लगाई गई हैं। डिमार्केशन के दायरे में दुकानें, चबूतरे, रैंप और अन्य निर्माण शामिल हैं।
लोगों की चिंता- मकान गया तो रोजगार भी जाएगा
प्रदर्शन कर रहे स्थानीय लोगों का कहना है कि वे वर्षों से न्यू सांगानेर रोड क्षेत्र में रह रहे हैं। कई परिवारों की कई पीढ़ियां इसी इलाके में बीती हैं। स्थानीय निवासी पूनम शर्मा ने कहा कि यदि मकान और दुकान प्रभावित हुए तो लोगों के सामने रहने के साथ रोजगार का संकट भी खड़ा हो जाएगा। कई परिवारों के बच्चे कॉलेज में पढ़ रहे हैं। ऐसे में कार्रवाई का असर उनके भविष्य पर भी पड़ेगा। लोगों ने डिमार्केशन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि कार्रवाई से पहले उनकी आपत्तियां और समस्याएं सुनी जानी चाहिए।
व्यापारियों की मांग- पहले तय हो पुनर्वास
स्थानीय व्यापार मंडल के संरक्षक ओम राजोरिया ने जेडीए की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि डिमार्केशन के दौरान पुलिस बल की मौजूदगी में व्यापारियों और स्थानीय लोगों के साथ धक्का-मुक्की हुई। उन्होंने कहा कि सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई से बड़ी संख्या में लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित होगी। व्यापारियों ने सवाल उठाया कि यदि दुकानें और मकान हटाए जाते हैं तो उनके पुनर्वास की क्या व्यवस्था होगी। उनका कहना है कि त्योहारी सीजन कारोबार के लिए महत्वपूर्ण है और ऐसे समय में कार्रवाई की आशंका से व्यापारी परेशान हैं। व्यापारियों ने मास्टर प्लान को लेकर भी स्थानीय लोगों से पर्याप्त बातचीत नहीं होने और पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं होने का मुद्दा उठाया।

समझाइश के लिए पहुंचे विधायक
विरोध की सूचना पर स्थानीय विधायक गोपाल शर्मा मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे लोगों और व्यापारियों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। विधायक ने कहा कि जनता की बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि लोगों को लगता है कि डिमार्केशन में कहीं पक्षपात हुआ है या गलत तरीके से निशान लगाए गए हैं तो सरकार इस मामले को देखेगी। उन्होंने बताया कि जेडीए अधिकारियों से लगातार बातचीत की जा रही है और जनहित को ध्यान में रखते हुए समाधान निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मास्टर प्लान पर भी उठाए सवाल
विधायक गोपाल शर्मा ने मास्टर प्लान को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि समय के साथ मास्टर प्लान में बदलाव होते रहे हैं और नियमों का पालन हर जगह एक जैसा नहीं हो पाया है। उनका कहना था कि जब जेडीए अस्तित्व में भी नहीं था, तब भी इस क्षेत्र में लोगों के मकान मौजूद थे। ऐसे में लोगों के भविष्य से जुड़ा फैसला केवल जेडीए स्तर पर नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की संभावना की भी बात कही।

अब घर, दुकान, रोजगार और पुनर्वास का सवाल
न्यू सांगानेर रोड का विवाद अब केवल सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ जेडीए न्यायालय के आदेश के तहत डिमार्केशन और नोटिस की कार्रवाई आगे बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोग और व्यापारी अपने घर, दुकान और रोजगार बचाने की मांग कर रहे हैं। स्थानीय लोगों की ओर से डिमार्केशन की निष्पक्षता, आपत्तियों की सुनवाई, मुआवजा और पुनर्वास की मांग उठाई जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में डिमार्केशन के बाद जारी होने वाले नोटिस, लोगों की आपत्तियों और प्रशासन की ओर से समाधान की दिशा में उठाए जाने वाले कदम महत्वपूर्ण होंगे।
पुनर्वास के बिना तोड़फोड़ मानवाधिकारों का हनन: खाचरियावास
वहीं न्यू सांगानेर रोड पर जेडीए की डिमार्केशन कार्रवाई के बीच रविवार को विरोध तेज हो गया। स्थानीय लोगों और व्यापारियों के प्रदर्शन के बाद पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने प्रभावित क्षेत्र का पैदल दौरा किया और व्यापारियों व मकान मालिकों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने सैकड़ों लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि बिना पुनर्वास और मुआवजे के मकान-दुकान तोड़ने की कार्रवाई की जाती है तो इससे प्रभावित परिवारों के सामने रहने और रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा।

खाचरियावास ने कहा कि सरकार को किसी भी कार्रवाई से पहले प्रभावित परिवारों के लिए मकान और व्यापारियों के लिए दुकान की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने इसे मानव अधिकारों से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि दुकान के बदले दुकान और मकान के बदले मकान की व्यवस्था के बाद ही आगे की कार्रवाई पर विचार होना चाहिए।
उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय जोधावाड़ा में 735 दुकानों को हटाने का उदाहरण देते हुए दावा किया कि प्रभावित दुकानदारों को लुआ मंडी में दुकान के बदले दुकान दी गई थी और किरायेदारों को मुआवजा भी दिया गया था। उनके अनुसार उस समय पुनर्वास नीति के तहत प्रभावित लोगों के हितों का ध्यान रखा गया था।
खाचरियावास ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, संबंधित मंत्री और स्थानीय विधायक पर नोटिस और तोड़फोड़ की कार्रवाई रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार को पहले प्रभावित लोगों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए और बिना मुआवजे व पुनर्वास के कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।
इस दौरान उन्होंने व्यापारियों और मकान मालिकों के साथ पूरी न्यू सांगानेर रोड का पैदल दौरा किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी प्रभावित लोगों के साथ खड़ी है और उनके मुद्दे को सड़क से सदन तक उठाएगी।

उल्लेखनीय है कि न्यू सांगानेर रोड पर सोडाला तिराहे से गुर्जर की थड़ी तक करीब 2.4 किलोमीटर क्षेत्र में जेडीए की ओर से डिमार्केशन की कार्रवाई की जा रही है। जेडीए के अनुसार करीब 260 निर्माण चिह्नित किए जाने हैं। वहीं स्थानीय लोग और व्यापारी मकान-दुकान प्रभावित होने की आशंका को लेकर पुनर्वास, मुआवजे और आपत्तियों की सुनवाई की मांग कर रहे हैं।



















