जयपुर। गुलाबी नगरी जयपुर की प्रकृति की गोद में स्थित अति प्राचीन एवं चमत्कारिक खोले के हनुमान मंदिर में भक्ति का अलौकिक प्रवाह देखने को मिल रहा है। हनुमंत धाम एवं श्री नरवर आश्रम के संस्थापक अनंत श्री विभूषित ब्रह्मलीन परम पूज्य श्री राधेलाल चौबे जी महाराज के आशीर्वाद से तथा शर्मा परिवार की मेजबानी में आयोजित नौ दिवसीय रामकथा के द्वितीय दिवस पर श्रद्धालु श्रीराम भक्ति के रस में सराबोर नजर आए।
कथा के दूसरे दिन मानस मर्मज्ञ पूज्य संत श्री मुरलीधर जी महाराज ने मंगलाचरण के साथ कथा का शुभारंभ किया। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज द्वारा रचित ‘श्रीरामचरितमानस’ के बालकांड में वर्णित मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के अवतार के कारणों और हेतुओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए भगवान राम के जन्मोत्सव की पावन कथा का रसपान कराया।
जय-विजय, मनु-शतरूपा और प्रतापभानु की कथा से समझाया अवतार का रहस्य
संत श्री मुरलीधर जी महाराज ने कथा के दौरान जय-विजय, मनु-शतरूपा और राजा प्रतापभानु की पूर्व जन्म की कथाओं का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान के इस धरा धाम पर अवतरित होने के पीछे यही मुख्य कारण थे।
महाराज जी ने प्रसंग के माध्यम से संदेश दिया कि जब-जब इस धरती पर ब्राह्मण, धेनु (गौमाता) और संत दुखी होते हैं, तब-तब भगवान अवतार लेते हैं। जब देवता और मानव राक्षसों के अत्याचारों से पीड़ित हो गए, तब उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की। तत्पश्चात भगवान ने दुष्ट रावण का संहार करने, पृथ्वी को पापों से मुक्त करने और युग परिवर्तन के लिए अवतार लिया। उन्होंने कहा कि जिनके हृदय में भगवान का वास होता है, वह मनुष्य कभी दुखी नहीं हो सकता।
जैसे ही पूज्य महाराज जी ने भगवान श्रीराम के जन्म के पावन क्षण पर प्रसिद्ध चौपाई “भए प्रकट कृपाला दीन दयाल कौशल्या हितकारी…” का गायन किया, पूरा कथा पांडाल जयकारों से गूंज उठा और श्रोता भाव-विभोर होकर नृत्य करने लगे।
“अवध में आनंद भयो जय कन्हैया लाल की” और “चार-चार प्रकटे ललनवा अवध में बाजै बधाईयां” के भजनों पर पांडाल का अद्भुत और भक्तिमय माहौल देखते ही बनता था। इसके साथ ही महाराज श्री द्वारा गाए गए विभिन्न लोक व भक्ति गीतों— “से लाला को जन्म सुन आई कौशल्या मैया दे दे बधाई” और “मीठो मीठो सरयू जी को पाणी लागे…” पर उपस्थित श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर झूमने और थिरकने लगे।
कथा की शुरुआत से पूर्व धार्मिक विधि-विधान के साथ व्यास पीठ और पवित्र श्री रामचरितमानस का पूजन-अर्चन किया गया। पूजन में मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष गिरधारी लाल, मुख्य यजमान आनंदी लाल शर्मा, रामस्वरूप शर्मा सहित अन्य गणमान्य भक्तों ने सहभागिता निभाई और महाराज श्री का आशीर्वाद प्राप्त किया।

















