आध्यात्मिक विरासत संग्रहालय: आत्म-जागृति का नया केंद्र बना जयपुर

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जयपुर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से “आध्यात्मिक विरासत संग्रहालय” को नए, भव्य और आधुनिक स्वरूप में समाज को पुनः समर्पित किया गया। इस अवसर पर बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित “आध्यात्मिक विरासत समारोह” में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त किया।

समारोह में ब्रह्माकुमारीज की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बी.के. जयंती दीदी ने कहा कि वर्तमान समय में मानसिक अशांति और तनाव का समाधान केवल आध्यात्मिक जीवनशैली और आत्मिक जागरूकता में निहित है। उन्होंने कहा कि “आध्यात्मिक विरासत संग्रहालय” व्यक्ति को स्वयं से जोड़ने और जीवन को सकारात्मक दिशा देने का माध्यम है। उन्होंने राजयोग ध्यान अपनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि ऐसे आध्यात्मिक प्रयास समाज को सही दिशा देते हैं। पूर्व अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष जसबीर सिंह ने संग्रहालय को सामाजिक समरसता का प्रतीक बताया। महासचिव राजयोगी करुणा भाई ने संस्थान की वैश्विक सेवाओं पर प्रकाश डाला।

जोनल हेड राजयोगिनी बी.के. सुषमा दीदी ने इसे आत्म-जागृति का माध्यम बताया, जबकि धार्मिक प्रभाग की अध्यक्षा बी.के. मनोरमा दीदी ने ऐसे आयोजनों को आध्यात्मिक पुनर्जागरण की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

सेवाकेंद्र प्रभारी बी.के. चंद्रकला दीदी ने बताया कि संग्रहालय लगभग 45×60 वर्ग फुट क्षेत्र में विकसित किया गया है, जिसमें आधुनिक तकनीक के माध्यम से ब्रह्माकुमारी संस्थान के इतिहास, आध्यात्मिक ज्ञान और मूल्यों को प्रदर्शित किया गया है। इसमें मेडिटेशन रूम, आध्यात्मिक मॉडल और प्रेरणादायक झांकियां शामिल हैं।

जो आगंतुकों को सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव कराती हैं। संग्रहालय की शुरुआत वर्ष 1967 में प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की प्रेरणा से हुई थी। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। समारोह के अंत में अतिथियों को ईश्वरीय सौगात भेंट की गई और प्रसाद वितरित किया गया।

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