पौने दो लाख के इनामी तस्कर सुनील मीणा को एएनटीएफ ने एमपी से दबोचा

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The ANTF apprehended Sunil Meena, a smuggler carrying a reward of ₹1.75 lakh, in Madhya Pradesh.
The ANTF apprehended Sunil Meena, a smuggler carrying a reward of ₹1.75 lakh, in Madhya Pradesh.

जयपुर। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) राजस्थान ने अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करीब 1.69 लाख रुपये के इनामी कुख्यात तस्कर सुनील मीणा (27) को मध्यप्रदेश के नीमच जिले के जीरन क्षेत्र से गिरफ्तार किया है।

एएनटीएफ टीम की ओर से चलाए गए ऑपरेशन नीलमणि के तहत करीब आठ माह तक लगातार निगरानी और खुफिया कार्रवाई के बाद यह सफलता मिली। गिरफ्तार आरोपित राजस्थान पुलिस की नारको टॉप-25 सूची में शामिल था और उसकी तलाश राजस्थान पुलिस, मध्यप्रदेश पुलिस तथा नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) को लंबे समय से थी। फिलहाल आरोपित से एएनटीएफ टीम पूछताछ करने में जुटी है।

पुलिस महानिरीक्षक (एएनटीएफ) विकास कुमार ने बताया कि गिरफ्तार आरोपित सुनील मीणा पर राजस्थान के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (अपराध) की ओर से एक लाख रुपये, पाली पुलिस की ओर से 50 हजार रुपये, उदयपुर पुलिस की ओर से दो हजार रुपये, मध्यप्रदेश पुलिस की ओर से 15 हजार रुपये तथा एनसीबी मध्यप्रदेश की ओर से दो हजार रुपये का इनाम घोषित था।

पुलिस महानिरीक्षक के अनुसार सुनील ने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई के बाद स्कूल छोड़ दिया और ईंट-भट्टे पर मजदूरी करने लगा। वर्ष 2014 में एक तस्कर के संपर्क में आने के बाद उसने डोडा चूरा तस्करी शुरू कर दी। शुरुआत में वह रात के समय तस्करी करने वाले वाहनों की एस्कॉर्टिंग करता था और प्रति वाहन 500 रुपये लेता था। बाद में खुद तस्करी का नेटवर्क खड़ा कर राजस्थान तक मादक पदार्थ पहुंचाने लगा, जहां प्रति खेप 15 हजार रुपये तक मिलने लगे। धीरे-धीरे वह कई बड़े तस्कर गिरोहों का प्रमुख सहयोगी बन गया।

पुलिस पर फायरिंग करने में भी नहीं हिचकता था

विकास कुमार ने बताया कि आरोपी तस्करी के दौरान पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए कई बार फायरिंग कर चुका है। पाली के सांडेराव और देसूरी, प्रतापगढ़ के छोटी सादड़ी तथा मध्यप्रदेश के जीरन थाना क्षेत्र में उसने पुलिस पर गोलियां चलाई थीं। वर्ष 2020 में देसूरी-चारभुजा क्षेत्र में हुई फायरिंग में एक कांस्टेबल घायल भी हुआ था।

जंगल में रहता था, पेड़ों के निशान से मंगवाता था खाना

गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी अपने घर की बजाय घने जंगलों में छिपकर रहता था। वह अपनी पत्नी से तय पेड़ों पर निशान बनवाकर वहीं भोजन और जरूरी सामान मंगवाता था, जिसे उसके साथी जंगल तक पहुंचाते थे। वह बेहद गोपनीय तरीके से कभी-कभार ही घर आता था।

चरवाहा बनकर जुटाई सूचना, बारिश बनी मददगार

एएनटीएफ के एक जवान को 15 दिन पहले चरवाहे के वेश में इलाके में भेजा गया था। उसने स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाई और पता लगाया कि आरोपी का गांव की एक युवती से भी संपर्क है, जिसके जरिए उसकी गतिविधियों का सुराग मिला। इसके बाद तकनीकी निगरानी बढ़ाई गई।

दो दिन पहले एएनटीएफ की टीम जंगल के समीप पहुंची। सूचना मिली कि सुनील रात में घर आने वाला है। इसी दौरान तेज बारिश शुरू हो गई, जिसका फायदा उठाकर पुलिस ने घर की घेराबंदी कर दी। बारिश के कारण आरोपी को पुलिस की भनक नहीं लगी और वह जंगल लौटने के बजाय घर में ही रुक गया।

ड्रम के पीछे रजाई ओढ़कर छिपा मिला

पुलिस ने जब दबिश दी तो परिजनों ने उसके घर में होने से इनकार कर दिया, लेकिन तलाशी के दौरान सुनील घर के अंदर एक ड्रम के पीछे रजाई ओढ़कर छिपा मिला। गिरफ्तारी के बाद उसने अपना नाम ‘दिनेश’ बताकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन पूछताछ में उसने अपनी वास्तविक पहचान स्वीकार कर ली। इसके बाद पुलिस उसे सुरक्षित लेकर रवाना हो गई।

प्रतापगढ़ पुलिस का मिला सहयोग

एएनटीएफ ने इस अभियान में प्रतापगढ़ पुलिस का भी सहयोग लिया। सीमावर्ती क्षेत्र और दुर्गम पहाड़ी इलाके की भौगोलिक जानकारी के कारण प्रतापगढ़ पुलिस ने तस्कर के ठिकाने तक पहुंचने और गिरफ्तारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

19 से अधिक मामले दर्ज

पुलिस के अनुसार सुनील के खिलाफ राजस्थान, मध्यप्रदेश और एनसीबी में एनडीपीएस अधिनियम, आर्म्स एक्ट, हत्या के प्रयास, धोखाधड़ी सहित 19 से अधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस अब उससे पूछताछ कर उसके नेटवर्क और अन्य तस्करों के संबंध में जानकारी जुटा रही है।

आईजीपी विकास कुमार ने बताया कि इस साहसिक अभियान को अंजाम देने वाली एएनटीएफ तथा प्रतापगढ़ पुलिस की टीम को मुख्यालय में सम्मानित किया जाएगा।

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