जयपुर। आदर्श नगर स्थित श्रीराम मंदिर में चल रही रामलीला में पुष्प वाटिका, गिरिजा पूजन, धनुष यज्ञ, लक्ष्मण-परशुराम संवाद और श्रीराम-जानकी विवाह की लीलाओं का मंचन किया गया। कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से रामायण के प्रसंगों को जीवंत कर दिया।
समिति के सचिव अनिल खुराना ने बताया कि गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम और लक्ष्मण पुष्प लेने वाटिका पहुंचे। इसी दौरान माता सीता अपनी सखियों के साथ गिरिजा पूजन के लिए वहां आईं। सीता जी ने लता की ओट से भगवान श्रीराम के दर्शन किए और माता गौरी के मंदिर में प्रार्थना की कि उन्हें श्रीराम पति के रूप में प्राप्त हों। माता गौरी ने उन्हें आशीर्वाद दिया—
“मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सांवरो।
करुना निधान सुजान सिलु सनेहु जानत रावरो॥”
इसके बाद मिथिला में सीता स्वयंवर का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। स्वयंवर की शर्त भगवान शिव के धनुष पिनाक पर प्रत्यंचा चढ़ाने की थी। अनेक राजा-महाराजाओं ने धनुष उठाने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो सके। अंत में गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से भगवान श्रीराम ने धनुष उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाते समय वह भंग हो गया। इसके साथ ही सभा मंडप जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। इसके बाद लक्ष्मण-परशुराम संवाद की लीला का मंचन हुआ।
समिति के सचिव अनिल खुराना ने बताया कि गुरुवार को मंथरा-कैकेयी संवाद, दशरथ-कैकेयी संवाद, कौशल्या-श्रीराम संवाद और श्रीराम वन गमन की लीलाओं का मंचन किया जाएगा।



















