जयपुर। ब्रज की पावन धरती बरसाना में ठाकुर श्री गिरिधरलाल एवं ब्रज की अधिष्ठात्री देवी श्री राधारानी का भव्य एवं दिव्य ब्याहुला उत्सव श्रद्धा, परंपरा और ब्रज रस के साथ संपन्न हुआ। इस अलौकिक विवाह महोत्सव में जयपुर के सरस निकुंज ने वधू पक्ष की भूमिका निभाई। श्री शुक संप्रदाय पीठाधीश्वर अलबेली माधुरी शरण महाराज और श्री सरस निकुंज के प्रवक्ता प्रवीण बड़े भैया नेतृत्व में वधू पक्ष ने पारंपरिक ब्रज रीति-रिवाजों के साथ ठाकुर जी का भव्य स्वागत किया। वधू पक्ष की ओर से तिलक, बधाई गायन, मंगलाचार और ब्रज की प्रसिद्ध ठिठोली ने वातावरण को सजीव ब्रज विवाह में बदल दिया।
प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ठाकुर श्री गिरिधरलाल जी की बारात लेकर बरसाना के विनोद बाबा आश्रम से रवाना हुए। बारात मार्ग में सरस निकुंज के सेवकों एवं श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा, जयघोष और मंगल ध्वनियों के साथ स्वागत किया।
इससे पूर्व लाडली जी को हल्दी का उबटन, मेहंदी रचाने की रस्में मायके के भाव से संपन्न कराई गई। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर ठाकुर श्री गिरिधरलाल जी एवं श्री राधारानी का विवाह वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ विधिवत संपन्न हुआ। इस अवसर पर गोकुल रमनरेती आश्रम के पीठाधीश्वर गुरु शरणानंद महाराज, मलूकपीठ के राजेंद्र दास महाराज सहित अनेक संत-महात्मा, प्रसिद्ध कथा वाचक उपस्थित रहे।
इस दिव्य आयोजन में देश-विदेश से हजारों श्रद्धालुओं के साथ छोटी काशी जयपुर से गए करीब 200 श्रद्धालु भी उपस्थित रहे। भजन-कीर्तन, शंखनाद और मंगल ध्वनियों से पूरा बरसाना भक्तिरस में डूबा रहा। कार्यक्रम की लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से लाखों श्रद्धालु ऑनलाइन भी इस ऐतिहासिक ब्याहुला उत्सव से जुड़े।




















