जयपुर। दिल्ली रोड स्थित प्राचीन श्री खोले के हनुमानजी मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के चौथे दिन सीता स्वयंवर, धनुष भंग, परशुराम-लक्ष्मण संवाद और श्रीराम-जानकी विवाह के प्रसंग सुनाए गए। शर्मा परिवार की मेजबानी में आयोजित कथा में संत मुरलीधर महाराज ने कहा कि अहंकार रूपी धनुष तोड़ने से ही जानकी रूपी भक्ति प्राप्त होती है। भगवान राम द्वारा शिव धनुष भंग करना अहंकार त्याग और विनम्रता का प्रतीक है।
महाराज ने परशुराम-लक्ष्मण संवाद का रोचक वर्णन किया। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रीराम-जानकी विवाह संपन्न हुआ। भरत-मांडवी, लक्ष्मण-उर्मिला और शत्रुघ्न-श्रुतकीर्ति के विवाह प्रसंग भी सुनाए गए। विवाह गीतों और भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे और कथा पंडाल भक्तिमय हो गया।
इस अवसर पर शुक संप्रदाय पीठाधीश्वर अलबेली माधुरी शरण महाराज, प्रवीण बड़े भैया, महंत भरत दास महाराज सहित अनेक संत-महंत उपस्थित रहे। कथा से पूर्व गिरधारी लाल शर्मा, बृजमोहन शर्मा, लक्ष्मण रावत, सरयू शरण शर्मा, रामदयाल गुप्ता, कृपाशंकर गोयल, गिरधारी लाल चतुर्वेदी, राजेश शर्मा और गोपाल सैनी ने व्यास पीठ का पूजन एवं आरती की।

















