जयपुर। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में रविवार को आराध्य देव गोविंद देव जी मंदिर में महंत अंजन कुमार गोस्वामी महाराज के सानिध्य में नववधू अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। जानकी नवमी के अवसर पर अंबाबाड़ी में आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में परिणय सूत्र में बंधे नव दंपतियों ने समारोह में सहभागिता कर वैदिक रीति से सुखद दाम्पत्य जीवन का संकल्प लिया। सीकर और अजमेर से आए नव दंपति ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
कार्यक्रम में सभी नव दंपतियों ने ठाकुर श्री राधा गोविंद देव जी, वेदमाता गायत्री, गुरु सत्ता एवं मां गौरी का पूजन कर अपने वैवाहिक जीवन की मंगलकामना की। गोविंद देव जी मंदिर के सेवा अधिकारी मानस गोस्वामी ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। आचार्य पीठ से अमरदीप पारीक, प्रखर सक्सेना, मोहन सिंह एवं अजय गुप्ता ने प्रज्ञा गीतों के साथ वैदिक मंत्रोच्चार से पंचकुंडीय गायत्री यज्ञ सम्पन्न कराया।
अमरदीप पारीक ने उद्बोधन में कहा कि पति-पत्नी गृहस्थ जीवन रूपी रथ के दो पहिए हैं। दोनों के संतुलन, सहयोग और परस्पर सम्मान से ही परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है। उन्होंने नव दंपतियों से जीवन भर एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील और सहयोगी बने रहने का आह्वान किया।श्रीराम जानकी सर्वजातीय सामूहिक विवाह सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. विष्णु दत्त पुजारी ने सभी नव दंपतियों को साड़ी, सुहाग सामग्री, साहित्य सेट एवं बलिवैश्व पात्र भेंट कर आशीर्वाद दिया।
गायत्री शक्तिपीठ ब्रह्मपुरी के सह व्यवस्थापक मणिशंकर पाटीदार के मार्गदर्शन में नव दंपतियों के सुखद दाम्पत्य जीवन के लिए विशेष आहुतियां अर्पित कराई गईं। गायत्री चेतना केंद्र जनता कॉलोनी के देवेंद्र यादव के मार्गदर्शन में साहित्य स्टॉल भी लगाई गई, जहां श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक साहित्य में रुचि दिखाई। समारोह की व्यवस्थाओं में बनीपार्क से रमेश अग्रवाल, प्रतापनगर से सियाराम शर्मा, झोटवाड़ा से कामिनी शर्मा एवं ज्योति सोनी, जलमहल से सतीश शर्मा, ब्रह्मपुरी से मनोज मौर्य, मुरलीपुरा से तरुण कुमावत तथा गोपालपुरा बाईपास से कमल नरूका सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने श्रमदान किया।
मदर्स डे के उपलक्ष्य में विश्व हिंदू परिषद की अनुपम मोदी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में महिलाओं ने हवन में सहभागिता की तथा अपनी माताओं की स्मृति में पौधारोपण करने का संकल्प लिया। मंदिर में दर्शनार्थ पहुंचे श्रद्धालुओं को “प्रज्ञा अभियान” पाक्षिक पत्रिका एवं “हारिए न हिम्मत” पुस्तिका ज्ञान प्रसाद के रूप में निःशुल्क वितरित की गई।
नववधु अभिनंदन समारोह का सबसे भावपूर्ण क्षण वह रहा जब सभी नव दंपतियों ने वैदिक परंपरा और ऋषि प्रणीत गृहस्थ जीवन की मर्यादाओं को आत्मसात करते हुए सामूहिक रूप से सात वचनों का पाठ किया। अग्निदेव, देवशक्तियों, हितैषियों एवं संत जनों की साक्षी में वरों ने अपनी धर्मपत्नी के प्रति निष्ठा, सम्मान, सहयोग और समर्पण का संकल्प लिया।
वरों ने अपनी धर्मपत्नी को अर्धांगिनी मानते हुए जीवन के प्रत्येक निर्णय में उनका सम्मान करने, गृहलक्ष्मी के रूप में उन्हें अधिकार देने तथा परिवार की व्यवस्था उनकी सहमति से संचालित करने का वचन दिया। उन्होंने यह भी प्रतिज्ञा की कि पत्नी के गुण-दोषों को आत्मीयता और सहनशीलता के साथ स्वीकार करेंगे तथा मित्रवत व्यवहार करते हुए जीवन में मधुरता और प्रेम बनाए रखेंगे।समारोह में वरों ने पत्नीव्रत धर्म का पालन करने, धर्मपत्नी की सुख-शांति, सुरक्षा और प्रगति के लिए सदैव ईमानदारी से प्रयासरत रहने तथा हर परिस्थिति में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का संकल्प भी दोहराया।
साथ ही यह विश्वास भी दिलाया कि मतभेदों का समाधान शांतिपूर्ण ढंग से करेंगे और कभी भी सार्वजनिक रूप से पत्नी का अपमान नहीं करेंगे। वधुओं ने भी सात वचन लेते हुए परिवार, संस्कार और पारस्परिक सम्मान को जीवन का आधार बनाने का संकल्प व्यक्त किया। समारोह के अंत में उपस्थित परिजनों एवं श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर नव दंपतियों को सुखमय, समृद्ध एवं संस्कारवान वैवाहिक जीवन के लिए शुभाशीष प्रदान किया।



















