जयपुर। सनातन धर्म में विशेष महत्व रखने वाले पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) की एकादशी यानी ‘कमला पद्मिनी एकादशी’ इस बार 27 मई (बुधवार) को बेहद शुभ संयोगों के बीच मनाई जाएगी। इस दिन राजयोग और सर्वार्थ सिद्धि योग का महासंयोग बन रहा है, जिससे इस व्रत का महत्व और अधिक बढ़ गया है।
पंडित राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि पुरुषोत्तम मास में आने वाली इस एकादशी को पद्मिनी और कमला एकादशी दोनों नामों से जाना जाता है। चूंकि अधिक मास हर तीन साल में एक बार आता है, इसलिए यह एकादशी भी तीन वर्ष में केवल एक बार ही आती है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन व्रत और आराधना करने से भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी विशेष कृपा बरसाते हैं।
पद्म पुराण के अनुसार, कमला एकादशी का व्रत रखने से न केवल भगवान श्रीहरि और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है, बल्कि पितरों को भी मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, इस व्रत को जीवन में सुख-समृद्धि और संतान सुख देने वाला भी माना गया है। इस पावन तिथि पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
इस दिन भगवान श्रीहरि को पीले पुष्प, पीले फल और पीले वस्त्र अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है। साथ ही, पूजा के दौरान ‘विष्णु सहस्रनाम’ का पाठ करने से जीवन के सभी कष्टों का निवारण होता है। वहीं बुधवार को पूजा-अर्चना के लिए दो विशेष और श्रेष्ठ मुहूर्त है। जिसमें बुधवार सुबह का पहला मुहूर्त: प्रातः 05:33 बजे से सुबह 08:57 बजे तक और दोपहर का दूसरा मुहूर्त: सुबह 10:39 बजे से दोपहर 12:21 बजे तक रहेगा।



















