जयकारों से गूंजे जिनालय: सवा लाख श्रद्धालुओं ने किया अनंत चतुर्दशी व्रत

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जयपुर। दिगम्बर जैन समाज ने शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी का महापर्व भक्ति, त्याग और तपस्या के साथ मनाया। इसी के साथ 11 दिवसीय दशलक्षण महापर्व का उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के साथ समापन हुआ। राजधानी के 250 से अधिक दिगम्बर जैन मंदिरों में दिनभर धार्मिक आयोजनों की धूम रही। मंदिरों में चौबीसी विधान महार्चना के तहत 24 तीर्थंकरों की विशेष पूजा-अर्चना की गई, वहीं शाम को समापन कलशाभिषेक के बाद 108 दीपकों से महाआरती की गई।

राजस्थान जैन युवा महासभा के प्रदेश महामंत्री विनोद जैन ‘कोटखावदा’ ने बताया कि अनंत चतुर्दशी पर जयपुर और आसपास के क्षेत्रों में सवा लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने निराहार रहकर एक दिवसीय उपवास रखा। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने तीन दिवसीय कर्म निर्झर तेला, रत्नत्रय व्रत और दशलक्षण उपवास की कठिन साधना भी पूरी की। श्रद्धालु दिनभर धर्म-ध्यान में लीन रहे और कई लोगों ने इस अवसर पर अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान भी बंद रखे।

वासुपूज्य भगवान का मोक्ष कल्याणक

अनंत चतुर्दशी पर जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य का मोक्ष कल्याणक दिवस भी श्रद्धापूर्वक मनाया गया। विभिन्न जिनालयों में प्रात: अभिषेक और शांतिधारा के बाद मंत्रोच्चार के बीच मोक्ष के प्रतीक निर्वाण लाडू अर्पित किए गए। विभिन्न चातुर्मास स्थलों पर संतों और विद्वानों ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि परद्रव्य से रहित होकर शुद्ध-बुद्ध आत्मा में लीन रहना ही सच्चा ब्रह्मचर्य है।

शहरभर के जिनालयों में विशेष आयोजन

सिरमोरियान आचार्यों का रास्ता स्थित मंदिर में मूलनायक भगवान आदिनाथ का अभिषेक कर अष्ट द्रव्य से पूजा की गई। आयोजन में विनोद जैन कोटखावदा, राकेश सोनी, हर्षित सरणका और दीपिका जैन सहित श्रद्धालु मौजूद रहे।

सांगाकान, किशनपोल बाजार स्थित मंदिर में अध्यक्ष प्रदीप जैन के नेतृत्व में नित्य नियम और दशलक्षण विधान पूजा के बाद भगवान वासुपूज्य को निर्वाण लाडू समर्पित किया गया।

शांतिनाथ जी की खोह में कमल वैद, मंजू वैद सहित श्रद्धालुओं ने 24 तीर्थंकरों का पूजन किया। वहीं शांतिनाथ मंदिर, मालवीय नगर सेक्टर-3 में सीएल जैन, महेंद्र साह आबूजीवाले, सतीश काला और संजय साह सहित श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चार के साथ अर्घ्य समर्पित किए।

चंद्रप्रभु मंदिर, श्योपुर, प्रताप नगर में दिव्या बाकलीवाल और अमिता साह के नेतृत्व में महिलाओं ने अष्ट द्रव्य से पूजा-अर्चना की और भक्ति नृत्य प्रस्तुत किए।

जनकपुरी में भी दिनभर धार्मिक आयोजन

जनकपुरी-ज्योतिनगर स्थित श्री दिगम्बर जैन मंदिर में दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन आचार्य आदित्य सागर महाराज के सान्निध्य में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम हुए। सुबह अभिषेक, विशेष शांतिधारा, उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा और विधान की समापन प्रक्रिया हुई। भगवान वासुपूज्य के मोक्ष कल्याणक पर विशेष पूजन, निर्वाण कांड का वाचन और निर्वाण लाडू समर्पित किया गया।

दोपहर में आदिनाथ भगवान से महावीर भगवान तक 24 तीर्थंकरों की आराधना करते हुए चौबीसी पूजन और मंडल विधान हुआ। शाम को श्रीजी की प्रतिमा को पांडाल में पांडुशिला पर विराजमान कर अनंत चतुर्दशी का कलशाभिषेक किया गया। धार्मिक क्रियाएं श्रमण संस्कृति संस्थान की विदुषी आशिका जैन और अनुषी जैन ने विधि-विधान से संपन्न कराईं।

शाम को आचार्य आदित्य सागर महाराज ने विशेष वार्षिक प्रतिक्रमण कराया। इसके बाद भक्तामर पाठ की दीप अर्चना हुई। आयोजन में मंदिर प्रबंध समिति, महिला मंडल, युवा मंच सहित बड़ी संख्या में समाजबंधुओं और श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।

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