शास्त्रीय संध्या में गूंजी राग बिहाग और झपताल की बंदिशें

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जयपुर। जवाहर कला केन्द्र की ओर से मंगलवार को शास्त्रीय संध्या का आयोजन किया गया। अमान मोहम्मद ने शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति दी। उन्होंने विभिन्न बंदिशें पेश कर वाहवाही लूटी। बड़ी संख्या में श्रोताओं ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। सुर लहरियों ने सुधी श्रोता को मंत्र मुग्ध किया।

अमान ने राग बिहाग से प्रस्तुति की शुरुआत की। उन्होंने विलंबित ख्याल की बंदिश ‘कैसे ये सुख सोहे’ गायी। इसके बाद उन्होंने मध्य लय ताल झपताल में निबद्ध बंदिश ‘कौन जोगी होए’ पेश की। उसके पश्चात ताल तीन ताल में निबद्ध पीली सी कामणगार को पेश किया।

उसके उपरान्त द्रुत तीन ताल में दरस पिया अब लो नहीं आवे को बखूबी पेश किया। फिर तराना और शास्त्रीय संगीत के सौंदर्य से सराबोर विभिन्न बंदिशों को प्रस्तुत कर श्रोताओं की दाद बटोरी।

इन्होंने की संगत

तानपुरे पर डॉ. रचना पारीक और चन्द्र शेखर, तबले पर मुजफ्फर रहमान, सारंगी पर जाकिर हुसैन और हारमोनियम पर जाकिर धौलपुरी ने संगत की।

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