जयपुर। सुभाष चौक, पानों का दरीबा स्थित श्री शुक संप्रदाय आचार्य पीठ श्री सरस निकुंज में शुक संप्रदाय पीठाधीश्वर अलबेली माधुरी शरण महाराज के सान्निध्य में परंपरागत फूल डोल उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
चालीस दिनों तक निरंतर होली उत्सव मनाने के बाद ठाकुर जी को रंग-बिरंगे पुष्पों से सुसज्जित झूले में विराजमान कर विशेष श्रृंगार किया गया। विविध व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया । संपूर्ण सरस निकुंज को पुष्पों की मनोहारी सजावट से अलंकृत किया गया। श्री सरस परिकर के प्रवक्ता प्रवीण बड़े भैया ने बताया कि इस अवसर पर वैष्णव भक्त मंडली ने फूल डोल के पदों का संगीतमय गायन कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
आज फूल को उत्सव आली…, फूल डोल दोउ झूलेंरी…, फूलि फूलि गावत आनंद मन फूले करत कलोलेंरी…, फूल डोल फूलत दोउ फूले…, फूली लता ललित लख हेली, फूल रही चहुंदिस फुलवारी, सरसमाधुरी लखि दम्पति छवि.. जैसे पदों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। पदों में वृंदावन की पुष्प-वाटिका, युगल सरकार के झूलन और प्रेम-माधुर्य का सजीव चित्रण प्रस्तुत किया गया।
श्री शुक संप्रदाय पीठाधीश्वर अलबेली माधुरी शरण महाराज श्री ने अपने आशीर्वचन में कहा कि फूल डोल उत्सव प्रेम, माधुर्य और समर्पण का उत्सव है। पुष्पों की कोमलता हमें अपने जीवन में विनम्रता और सौहार्द के भाव को धारण करने की प्रेरणा देती है।
उत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुष्प झूलन एवं भोग दर्शन का लाभ प्राप्त किया। संपूर्ण आयोजन भक्ति, संगीत और आध्यात्मिक आनंद से ओतप्रोत रहा।




















