राजघराने की परंपरा के साथ शुरू हुआ शीतला माता का लक्खी मेला

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जयपुर/चाकसू। जयपुर जिले के चाकसू स्थित शील डूंगरी पहाड़ी पर विराजित मां शीतला माता के प्रसिद्ध मंदिर में शीतलाष्टमी के अवसर पर दो दिवसीय वार्षिक लक्खी मेले की शुरुआत बुधवार से हो गई। मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। दूर-दराज के गांवों, जयपुर जिले के विभिन्न इलाकों और अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर ट्रस्ट समिति, पुलिस और प्रशासन की ओर से मेले को लेकर व्यापक और चाकचौबंद व्यवस्थाएं की गई हैं।

स्थानीय विधायक राम अवतार बैरवा ने कहा कि यह लक्खी मेला आस्था का संगम है और क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं का प्रतीक भी है। इसी तरह बालोतरा जिले के निकटवर्ती कनाना गांव में भी मंगलवार को शीतला सप्तमी के अवसर पर भव्य मेले का आयोजन किया गया।

ठंडे पकवानों का लगाया जाता है भोग

शीतलाष्टमी से एक दिन पहले घर-घर में रांधापुआ बनाने की परंपरा निभाई जाती है। मंगलवार को महिलाओं ने माता के लिए राबड़ी, पुआ, पापड़ी सहित कई पारंपरिक व्यंजन तैयार किए। मान्यता है कि शीतला माता को ठंडे भोजन का भोग लगाने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है और गर्मी से फैलने वाले रोगों से रक्षा होती है। मंदिर में श्रद्धालु इन पकवानों का भोग लगाकर परिवार के स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करते हैं।

600 वर्ष पुराना मंदिर, पहली पूजा राजघराने की परंपरा

जयपुर राजदरबार की ओर से निर्मित यह मंदिर करीब 600 वर्ष पुराना बताया जाता है। आज भी सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार पहला भोग जयपुर राजघराने की ओर से भेजे गए प्रसाद से लगाया जाता है। मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष हनुमान प्रजापत ने बताया कि शील डूंगरी पहाड़ी पर स्थित मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को लगभग 151 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। इसके बावजूद भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखती और बड़ी संख्या में लोग माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

240 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी

मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए विशेष इंतजाम किए गए हैं। पूरे मेला क्षेत्र में करीब 240 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। पुलिस और नगर प्रशासन की ओर से अलग-अलग कंट्रोल रूम भी स्थापित किए गए हैं। मेला परिसर के विभिन्न स्थानों पर पुलिस जवान तैनात हैं। साथ ही यातायात और पार्किंग व्यवस्था को भी सुव्यवस्थित किया गया है। दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए अलग-अलग पार्किंग स्थल बनाए गए हैं।

मेले में बाजार और मनोरंजन की रौनक

धार्मिक आस्था के साथ-साथ मेले में बाजार और मनोरंजन की भी खास रौनक देखने को मिल रही है। बच्चों और परिवारों के लिए झूले, खेल और विभिन्न स्टॉल लगाए गए हैं। प्रसाद और मिठाइयों की दुकानों पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। इसके अलावा पारंपरिक कार्यक्रम और खेलकूद गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं, जिससे मेला एक बड़े सामाजिक उत्सव का रूप ले लेता है।

सामाजिक समरसता का मंच

चाकसू का शीतलाष्टमी मेला केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का भी मंच है। मेले के दौरान विभिन्न समाजों की गोठियां आयोजित होती हैं, जहां आपसी विवादों का समाधान किया जाता है। कई समुदाय यहां अपने बच्चों के विवाह संबंध भी तय करते हैं। इस तरह शील डूंगरी का लक्खी मेला आस्था, परंपरा और सामाजिक मेलजोल का अनूठा संगम बनकर सामने आता है।

मेले में पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, जिससे श्रद्धालु सुरक्षित वातावरण में माता के दर्शन कर सकें।

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