जयपुर। देश में बढ़ते हृदय रोगों के बीच एओर्टिक वाल्व की गंभीर समस्या अब आधुनिक चिकित्सा तकनीक के जरिए बिना ओपन हार्ट सर्जरी के भी सफलतापूर्वक उपचार योग्य हो गई है। इस उन्नत प्रक्रिया को ट्रांस-कैथेटर एओर्टिक वाल्व इम्प्लांटेशन (टीएवीआई ) कहा जाता है।
कोटा निवासी 76 वर्षीय एक बुजुर्ग व्यक्ति को लंबे समय से सांस फूलने और दैनिक कार्यों में परेशानी हो रही थी। जांच में गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस पाया गया, जिसके लिए पहले ओपन हार्ट सर्जरी की सलाह दी गई थी। अधिक उम्र और जोखिम को देखते हुए उन्होंने वैकल्पिक उपचार अपनाया, जिसके बाद टीएवीआई तकनीक उनके लिए सुरक्षित विकल्प साबित हुई।
स्ट्रक्चरल हार्ट इंटरवेंशन विशेषज्ञ डॉ. अमित गुप्ता ने बताया कि एओर्टिक वाल्व शरीर में रक्त संचार को नियंत्रित करता है, लेकिन उम्र बढ़ने पर यह सख्त होकर संकरा हो जाता है, जिससे सांस फूलना, सीने में दर्द और बेहोशी जैसी समस्याएं होती हैं। उन्होंने बताया कि टीएवीआई प्रक्रिया में जांघ की नस के जरिए कैथेटर से नया वाल्व हृदय में प्रत्यारोपित किया जाता है, जिसमें छाती खोलने की आवश्यकता नहीं होती।
डॉ. गुप्ता के अनुसार इस तकनीक के प्रमुख लाभ हैं—कम दर्द, कम रक्तस्राव, 2-3 दिन में अस्पताल से छुट्टी और 1-2 दिनों में सामान्य जीवन में वापसी। यह तकनीक विशेष रूप से बुजुर्ग और हाई-रिस्क मरीजों के लिए अत्यंत सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है।
मणिपाल हॉस्पिटल जयपुर के डायरेक्टर रंजन ठाकुर ने बताया कि अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से जटिल हार्ट रोगों का उपचार बिना ओपन सर्जरी के संभव हो रहा है, जिससे मरीजों को बेहतर जीवन गुणवत्ता और तेजी से रिकवरी मिल रही है।



















