प्रबोधकों के साथ भेदभाव बंद हो,पदनाम ‘अध्यापक’ किया जाए : सुभाष चौधरी

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Discrimination against *Prabodhaks* must stop.
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जयपुर। राजस्थान शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चौधरी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रदेश में वर्ष 2008 से नियुक्त करीब 25 हजार प्रबोधकों के साथ केवल पदनाम के कारण भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि प्रबोधक पदनाम समाप्त कर इसे तत्काल ‘अध्यापक’ किया जाए।

सुभाष चौधरी ने कहा कि प्रबोधक तृतीय श्रेणी शिक्षकों के समान ही कार्य कर रहे हैं। उनकी शैक्षणिक योग्यता, कार्यप्रणाली, वेतनमान और सेवाएं लगभग समान होने के बावजूद केवल पदनाम अलग होने के कारण उन्हें पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों से वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि समान कार्य के लिए समान अधिकार मिलना चाहिए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र ही मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो राजस्थान शिक्षक संघ प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेगा। इसी क्रम में अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) के प्रदेश अध्यक्ष गजेन्द्र सिंह राठौड़ के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में प्रबोधक पदनाम बदलकर ‘अध्यापक’ किए जाने तथा तृतीय श्रेणी शिक्षकों के समान समस्त सेवा लाभ, पदोन्नति एवं अन्य सुविधाएं प्रदान करने की मांग की गई। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि लंबे समय से प्रबोधकों के साथ हो रहे इस भेदभाव को समाप्त कर समान कार्य के लिए समान अवसर सुनिश्चित किए जाएं।

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