जयपुर। बृहस्पति ग्रह करीब 120 दिन तक वक्री रहने के बाद 11 मार्च को शाम करीब 4:30 बजे मिथुन राशि में मार्गी हो जाएंगे। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार गुरु की चाल में यह परिवर्तन अगले लगभग नौ महीनों तक कई क्षेत्रों में प्रगति और भाग्योदय के संकेत दे रहा है। इस दौरान शिक्षा, व्यापार, करियर और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े कई अटके कार्यों में तेजी आने की संभावना है।
ज्योतिषाचार्य डॉ. महेन्द्र मिश्रा के अनुसार जब कोई शुभ ग्रह वक्री अवस्था से मार्गी होता है तो उसके सकारात्मक प्रभाव धीरे-धीरे दिखाई देने लगते हैं। गुरु को ज्ञान, धर्म, शिक्षा, मार्गदर्शन और समृद्धि का कारक ग्रह माना जाता है। इसलिए इसकी चाल में बदलाव का असर केवल व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज, शिक्षा व्यवस्था और आर्थिक गतिविधियों पर भी व्यापक रूप से देखने को मिलता है।
उन्होंने बताया कि देवगुरु बृहस्पति 11 नवंबर को रात 10:08 बजे वक्री हुए थे। इसके बाद 5 दिसंबर 2025 को वक्री अवस्था में ही उन्होंने मिथुन राशि में प्रवेश किया था। अब 11 मार्च 2026 को वे इसी राशि में मार्गी होंगे। मार्गी होने के बाद गुरु लगभग नौ महीने तक सीधी चाल में रहेंगे और यह स्थिति 12 दिसंबर तक बनी रहेगी। ज्योतिषीय दृष्टि से इस अवधि को प्रगति, संतुलन और नई संभावनाओं का समय माना जा रहा है।
डॉ. मिश्रा के अनुसार गुरु के मार्गी होने के बाद लंबे समय से अटके कार्य धीरे-धीरे पूरे होने लगते हैं। व्यापारिक निर्णयों में गति आएगी, निवेश और नए प्रोजेक्ट शुरू होने की संभावनाएं बनेंगी। साथ ही नौकरी और करियर से जुड़े मामलों में भी नए अवसर सामने आ सकते हैं।
शिक्षा और आर्थिक गतिविधियों में बढ़ेगी सक्रियता
गुरु के मार्गी होने से शिक्षा, ज्ञान और मार्गदर्शन से जुड़े क्षेत्रों में विशेष सक्रियता बढ़ने के संकेत हैं। विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर अवसर बन सकते हैं। वहीं व्यापार और आर्थिक गतिविधियों में भी धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल सकता है तथा लंबित योजनाएं आगे बढ़ सकती हैं।
2 जून से कर्क राशि में प्रवेश रहेगा विशेष शुभ
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 2 जून 2026 को देवगुरु बृहस्पति मिथुन राशि से कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। कर्क को बृहस्पति की उच्च राशि माना जाता है, इसलिए 2 जून से 31 अक्टूबर तक का समय विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है। इस अवधि में शिक्षा, पारिवारिक उन्नति, संतान सुख और आर्थिक स्थिरता के योग बन सकते हैं।
इसके बाद 31 अक्टूबर को गुरु सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। इस परिवर्तन से नेतृत्व क्षमता बढ़ने, सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि और करियर में प्रगति के नए अवसर बनने के संकेत माने जा रहे हैं।




















