जयपुर। शीतलाष्टमी के अवसर पर गणगौर पूजन करने वाली महिलाओं, युवतियों और नवविवाहिताओं ने कुम्हार के घर से मिट्टी लाकर होली की राख के साथ ईसर, गौरा, रोवां, मालन और कनीराम की प्रतिमाएं बनाई। इसके बाद माली के यहां से दूब, फूल और जल भरकर कलश लाए गए और ईसर-गणगौर का विधि-विधान से पूजन किया गया।
शाम को बालिकाओं ने बींद-बीनणी का स्वरूप धारण कर बिंदौरी निकाली। बींद-बीनणी के पीछे गणगौर पूजन करने वाली महिलाएं नाचती-गाती चल रही थीं और कॉलोनियों में घर-घर वार फेरी की गई। शाम होते-होते राजधानी की कई गलियों में बींद-बीनणी की बिंदौरियां निकाली गईं, जिससे उत्सवी माहौल बन गया।




















