सात दिवसीय शिव महापुराण कथा के अंतिम दिन भी पांडाल में रहीं श्रद्धालु की भीड़

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A crowd of devotees remained in the marquee even on the final day of the seven-day Shiv Mahapuran Katha.
A crowd of devotees remained in the marquee even on the final day of the seven-day Shiv Mahapuran Katha.

जयपुर। मानसरोवर के वीटी रोड़ ग्राउंड में पिछले सात दिन से चल रहीं प्रदीप मिश्रा की शिवमहापुराण कथा का गुरुवार को समापन हुआ। कथा के समापन पर पांडालों मे श्रद्धालुओं की काफी भीड़ देखने को मिली।

इस दौरान कथा वाचक प्रदीप मिश्रा ने बताया कि भगवान शिव तुम्हें तुम्हारे माता के रूप में, पिता के रूप में, तुम्हारे इष्ट मित्र के रूप में मिलते हैं। जब तुम्हारे ऊपर संकट आता है, तब उसी समय वह तुम्हारे साथ खड़े होते हैं, लेकिन तुम उन्हें पहचान नहीं पाते। उन्होंने कहा- जैसे इंसान जीते जी अपने मां-बाप को नहीं पहचान पाता। पति-पत्नी एक-दूसरे को नहीं समझ पाते, उसी तरह परमात्मा को भी तुम पहचान नहीं पाते।

उन्होंने कहा- भगवान शिव असली स्वरूप में कभी दर्शन नहीं देते हैं। अगर तुम सोचते हो कि वह गले में नाग पहनकर, जटा बांधकर, माथे पर चंद्रमा धारण करके सामने आएंगे तो ऐसा नहीं है।दुनिया से जाने के बाद लोगों की पसंद की बनवाते मिठाई, पहले प्रेम से नहीं बोलते
प्रदीप मिश्रा ने कहा- जब कोई व्यक्ति इस दुनिया में होता है, तब हम उसे उतना महत्व नहीं देते। लेकिन उसके जाने के बाद उसकी पसंद की मिठाई बनवाते हैं।

उन्होंने कहा- अगर वही व्यक्ति जब जिंदा था, तब उसे मिठाई नहीं भी खिलाते, लेकिन उससे प्रेम से मीठी वाणी बोल देते, तो वह आशीर्वाद देकर ही जाता। प्रदीप मिश्रा ने कहा कि इंसान ने परमात्मा को केवल मूर्ति में ढूंढने की कोशिश की है, लेकिन उसे सहजता में ढूंढा ही नहीं। उन्होंने कहा- भगवान हर जीव में विराजते हैं, जरूरत है तो उन्हें पहचानने और महसूस करने की। जिसके बाद कथा का समापन किया गया।

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