
जयपुर। दैत्य गुरु शुक्र ने खगोलीय परिवर्तन करते हुए अपनी राशि के साथ-साथ नक्षत्र भी बदल लिया है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, शुक्र ग्रह अब तक गुरु की राशि मीन में उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में गोचर कर रहा था, जो अब मंगल की राशि मेष में प्रवेश करते हुए अश्विनी नक्षत्र में संचार कर रहा है।
राशि और नक्षत्र दोनों का एक साथ परिवर्तन दुर्लभ संयोग माना जाता है, जो विभिन्न क्षेत्रों में तेजी, नई शुरुआत और अचानक अवसरों के संकेत देता है। ज्योतिषाचार्य डॉ. महेन्द्र मिश्रा ने बताया कि शुक्र ग्रह मेष राशि में अश्विनी, भरणी और कृतिका नक्षत्रों से गुजरते हुए 19 अप्रैल को दोपहर 3:46 बजे तक संचार करेगा। इस अवधि में आयात-निर्यात क्षेत्र में वृद्धि के संकेत हैं, वहीं विलासिता की वस्तुओं के दामों में तेजी आ सकती है।
राजनीतिक दृष्टिकोण से यह गोचर कुछ राशियों के लिए मिश्रित परिणाम देने वाला हो सकता है। विशेष रूप से कन्या और मकर नाम राशि के अनुसार सत्ता पक्ष के लिए शुभ फलों में कमी तथा असंतोष की स्थिति बनने के संकेत हैं।
शुक्र ग्रह भोग-विलास, सौंदर्य, कला, प्रेम संबंध, करियर तथा दाम्पत्य जीवन का कारक माना जाता है, इसलिए इसका प्रभाव व्यापक रूप से देखने को मिलेगा।
जिन जातकों की कुंडली में शुक्र ग्रह शुभ स्थिति में है, उन्हें इस गोचर का विशेष लाभ मिलेगा। वहीं, जिनकी कुंडली में शुक्र कमजोर है, उन्हें कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इस दौरान महिलाओं का सम्मान करना, माता महालक्ष्मी की उपासना, तुलसी के पौधे पर दीप प्रज्वलित करना, शुक्रवार को सुहागिन स्त्री को भोजन कराना तथा गोशाला में हरा चारा दान करना विशेष लाभकारी रहेगा।



















