लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन ने दक्षिणी कमान का कार्यभार किया ग्रहण

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Lieutenant General Sandeep Jain Assumes Command of Southern Command
Lieutenant General Sandeep Jain Assumes Command of Southern Command

जयपुर। लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन एवीएसएम एसएम ने जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, दक्षिणी कमान के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम का स्थान लिया है, जिन्होंने आज उप सेना प्रमुख का पदभार संभाला है।

नेशनल डिफेंस एकेडमी के पूर्व कैडेट लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन ने जून 1988 में महार रेजिमेंट में कमीशन लिया। लगभग चार दशकों के विशिष्ट सैन्य करियर में उन्होंने विविध संचालनात्मक परिदृश्यों में व्यापक कमांड एवं स्टाफ नियुक्तियों का दायित्व संभाला है।

जन संपर्क अधिकारी (रक्षा) जयपुर (राजस्थान) ले कर्नल निखिल धवन के अनुसार जनरल अधिकारी ने अर्द्ध-विकसित क्षेत्र तथा दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन में एक इन्फैंट्री बटालियन को कमान किया है, साथ ही स्ट्राइक कोर में इन्फैंट्री ब्रिगेड, काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स तथा उत्तरी कमान में पिवट कोर की कमान भी की है। उनके संचालनात्मक अनुभव में ऑपरेशन पवन में भागीदारी, इथियोपिया में संयुक्त राष्ट्र मिशन में सैन्य पर्यवेक्षक के रूप में सेवा तथा नियंत्रण रेखा और पूर्वोत्तर क्षेत्र में उच्च ऊँचाई वाले क्षेत्रों एवं काउंटर इंसर्जेंसी अभियानों में अनेक कार्यकाल शामिल हैं। वह कर्नलऑफ़ महार रेजिमेंट भी हैं।

दक्षिणी कमान का कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व, उन्होंने मुख्यालय दक्षिणी कमान में चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में कार्य किया, जहाँ उन्होंने क्षमता विकास, बल संरचना पुनर्गठन तथा समग्र संचालनात्मक तत्परता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।जनरल अधिकारी ने आर्मी वार कॉलेज में हायर कमांड कोर्स तथा केन्या में नेशनल डिफेंस कोर्स किया है। उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल एवं सेना मेडल से सम्मानित किया गया है।


कार्यभार ग्रहण करने के उपरांत लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन ने दक्षिणी कमान युद्ध स्मारक पर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा मुख्यालय दक्षिणी कमान में गार्ड ऑफ ऑनर प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि कमान अपने विविध उत्तरदायित्व क्षेत्रों—जिनमें रेगिस्तान, रण एवं क्रीक क्षेत्र, तटीय क्षेत्र, द्वीपीय क्षेत्र तथा भीतरी भूभाग शामिल हैं—में संकलनात्मक तत्परता पर निरंतर ध्यान केंद्रित करती रहेगी। उन्होंने जेएआई ढांचे के अंतर्गत संयुक्तता को सुदृढ़ करने, स्वदेशी क्षमता विकास तथा प्रौद्योगिकी के समावेशन पर बल दिया तथा सभी रैंकों को बदलती संकलनात्मक चुनौतियों के अनुरूप उच्च स्तर की तैयारी, व्यावसायिकता एवं युद्धक तत्परता बनाए रखने के लिए निर्देशित किया।

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