जयपुर। प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों पर रोक लगाने के लिए राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने आमजन को सतर्क रहने और डिजिटल माध्यमों का सही उपयोग करने की अपील की है। इसी क्रम में भारत सरकार के दूरसंचार विभाग द्वारा संचालित ‘संचार साथी’ ऐप के अंतर्गत ‘चक्षु पोर्टल’ को साइबर सुरक्षा का प्रभावी माध्यम बताया गया है।
उपमहानिरीक्षक पुलिस (साइबर क्राइम) शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि चक्षु पोर्टल की विशेषता यह है कि यह केवल धोखाधड़ी में प्रयुक्त मोबाइल नंबर को ही बंद नहीं करता, बल्कि संबंधित मोबाइल के आईएमईआई नंबर को भी ब्लैकलिस्ट कर देता है। इससे अपराधी उसी फोन में दूसरी सिम डालकर दोबारा ठगी नहीं कर पाते।
पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने के लिए नागरिकों को संदिग्ध कॉल, एसएमएस या सोशल मीडिया संदेश से जुड़ी जानकारी, घटना की तारीख-समय और स्क्रीनशॉट अपलोड करना होता है।
पुलिस के अनुसार कुरियर के नाम पर कॉल, केवाईसी अपडेट के बहाने निजी जानकारी मांगना, खुद को पुलिस, सीबीआई, आरबीआई या कस्टम अधिकारी बताकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी देना जैसे मामलों में तुरंत चक्षु पोर्टल पर रिपोर्ट करें। इसके अलावा +92, +84 या +62 जैसे विदेशी नंबरों से आने वाले संदिग्ध कॉल, जॉब ऑफर या मिस कॉल की सूचना देना भी जरूरी है।
यदि केवल संदिग्ध कॉल या मैसेज आया है और कोई आर्थिक नुकसान नहीं हुआ है, तो चक्षु पोर्टल पर रिपोर्ट करें। यदि ठगी हो चुकी है और पैसे कट गए हैं, तो तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि रकम फ्रीज कराई जा सके। वहीं मोबाइल चोरी या गुम होने पर संचार साथी के सीईआईआर पोर्टल का उपयोग कर उसे ब्लॉक या ट्रैक किया जा सकता है।
राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर सतर्क रहें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 / 9257510100 पर सूचना दें। पुलिस का कहना है कि जागरूकता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।




















