जयपुर। करधनी क्षेत्र में सीवर सफाई के दौरान जहरीली गैस से दो कार्मिकों की मौत के मामले में नगर निगम प्रशासन ने छह सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति को एक सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। लगातार हो रहे ऐसे हादसों और सुरक्षा उपायों की कमी ने व्यवस्था की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गौरतलब है कि झोटवाड़ा जोन के करधनी क्षेत्र में 17 अप्रैल को सीवर लाइन की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से नाहरगढ़ निवासी अजय और बनीपार्क निवासी राम बाबू की मौत हो गई थी। बताया जा रहा है कि दोनों मजदूर बिना सुरक्षा उपकरण के सीवर में उतरे थे। उन्हें बचाने के लिए नीचे उतरे कांस्टेबल बाबूलाल भी गैस की चपेट में आकर अस्वस्थ हो गए।
नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त नरेंद्र कुमार बंसल ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच समिति का गठन किया गया है। समिति में अतिरिक्त आयुक्त द्वितीय प्रवीण कुमार, उपायुक्त स्वास्थ्य ओमप्रकाश थानवी, झोटवाड़ा जोन की उपायुक्त मनीषा यादव, अधीक्षण अभियंता (सीवर) चरण सिंह मीणा, अधीक्षण अभियंता दिनेश चंद गुप्ता और अधिशाषी अभियंता गोपाल मूंड शामिल हैं। समिति को सात दिन में जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
जानकारी के अनुसार शहर में ‘मैनहोल’ को ‘मशीनहोल’ में बदलने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर मशीनों का उपयोग सीमित है और कर्मचारियों को जोखिम उठाकर सीवर में उतरना पड़ता है। पिछले पांच वर्षों में जयपुर में सीवर सफाई के दौरान दम घुटने से सात मजदूरों की मौत हो चुकी है, लेकिन अधिकांश मामलों में ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई।
नगर निगम का कुल बजट करीब 2700 करोड़ रुपए है, जिसमें से लगभग 700 करोड़ रुपए सफाई व्यवस्था और 145 करोड़ रुपए सीवरेज पर खर्च किए जाते हैं। इसके बावजूद सुरक्षा मानकों का पालन नहीं होना चिंता का विषय बना हुआ है। सीवर सफाई को सुरक्षित बनाने के लिए करीब तीन वर्ष पहले 1.17 करोड़ रुपए की लागत से तीन रोबोट भी खरीदे गए थे, लेकिन वे अधिकतर समय निष्क्रिय पड़े रहते हैं।
घटना के बाद पुलिस और प्रशासन जांच में जुटे हैं। रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही जा रही है, लेकिन बार-बार हो रहे ऐसे हादसे व्यवस्थागत खामियों की ओर इशारा कर रहे हैं।



















