अनशन पर बैठे रोडवेज कर्मचारी: नौ दिन बाद भी नहीं निकला समाधान

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Roadways employees sit on hunger strike.
Roadways employees sit on hunger strike.

जयपुर। राजस्थान परिवहन निगम में कर्मचारियों के कथित शोषण और समस्याओं के समाधान में देरी के विरोध में चल रहा आंदोलन मंगलवार को नौवें दिन भी जारी रहा। भारतीय मजदूर संघ और भारतीय परिवहन मजदूर महासंघ से जुड़े राजस्थान परिवहन निगम संयुक्त कर्मचारी फेडरेशन के बैनर तले 20 अप्रैल से रोडवेज मुख्यालय पर क्रमिक अनशन किया जा रहा है।

मंगलवार को भी भीलवाड़ा, नागौर और ब्यावर आगार के 11 पदाधिकारी अजमेर संभाग सचिव डीगराज सिंह के नेतृत्व में अनशन पर बैठे। फेडरेशन के प्रदेश महामंत्री सत्यनारायण शर्मा ने निगम प्रबंधन पर कर्मचारियों के साथ अनुचित श्रम व्यवहार का आरोप लगाते हुए कहा कि कई दिनों तक लगातार ड्यूटी लेने के बावजूद अवकाश नहीं दिया जा रहा है और मेडिकल अवकाश पर भी अघोषित रोक से कर्मचारी परेशान हैं।

प्रदेश अध्यक्ष आनंद सिंह नयाल ने आरोप लगाया कि रोडवेज को निजीकरण की ओर धकेला जा रहा है। उन्होंने कहा कि निगम की बसों को शहर के प्रमुख मार्गों से हटाकर ट्रांसपोर्ट नगर व हीरापुरा टर्मिनल भेजा जा रहा है, जबकि निजी बसें अभी भी प्रमुख मार्गों से संचालित हो रही हैं। साथ ही अनुबंधित वाहनों को बढ़ावा देने और पूर्व में हुए अनुबंधों में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच लंबित होने पर भी सवाल उठाए गए।

कर्मचारियों ने पदोन्नति (डीपीसी) में भेदभाव, 3000 किलोमीटर संचालन की बाध्यता के चलते करीब 150 कर्मचारियों का वेतन रोके जाने, तथा मेडिकल प्रमाण पत्रों को लेकर दबाव बनाने जैसे मुद्दे भी उठाए।

अखिल भारतीय कार्यसमिति सदस्य मनीषा मेघवाल ने आरोप लगाया कि चालक-परिचालकों से 18-20 घंटे तक कार्य कराया जा रहा है, लेकिन ओवरटाइम का भुगतान और साप्ताहिक अवकाश नहीं दिया जा रहा। एजेंसी के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों के वेतन, पीएफ और ईएसआई में अनियमितताओं की शिकायत भी सामने आई है।

राष्ट्रीय मंत्री दिनेश कोठारी ने चालकों के प्रमोशन चैनल को लागू करने में देरी पर नाराजगी जताई, जबकि मीडिया प्रमुख महेंद्र प्रताप सिंह बारैठ ने कुछ अधिकारियों की फर्जी डिग्रियों की जांच की मांग दोहराई।

धरने में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाया भुगतान, पेंशन में वृद्धि, निशुल्क पास की संख्या बढ़ाने, अवकाश नियमों में सुधार और ग्रेड पे संशोधन जैसी मांगें भी उठाई गईं।

आंदोलन में प्रदेश पदाधिकारियों सहित 50 से अधिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि मांगों का समाधान नहीं होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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