जयपुर। जगतपुरा स्थित गुप्त वृंदावन धाम में आयोजित इंटरनेशनल गीता ओलंपियाड- 2026” का परिणाम घोषित कर दिया गया है। इस ऑनलाइन ओलंपियाड में 24 राज्यों, 161 शहरों तथा देश-विदेश से कुल 2790 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
गुप्त वृंदावन धाम के अध्यक्ष अमितासना दास ने बताया कि प्रतियोगिता का उद्देश्य प्रतिभागियों को भगवद्गीता के अध्याय 13 से 18 के अध्ययन, आध्यात्मिक जीवन तथा कृष्णभावनामृत से जोड़ना था। परीक्षा 19 अप्रैल 2026 को सफलतापूर्वक आयोजित की गई थी। आयोजकों के अनुसार यह ओलंपियाड केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि गीता अध्ययन एवं कृष्णभावना जागरण का वैश्विक अभियान बन चुका है।
शीर्ष विजेताओं में प्रथम पुरस्कार – डॉ. केवल कृष्ण गुप्ता (जयपुर) 51,000 रुपए, द्वितीय पुरस्कार, यशस्वी श्रृंगी (कोटा) 21 हजार रुपए, तृतीय पुरस्कार नेहा माहावर (कोटा) 11 हजार रुपए रहा। रैंक 4 से 13 तक के प्रतिभागियों को “गीता श्री” सम्मान के साथ 2100 के आध्यात्मिक पुरस्कार तथा रैंक 14 से 113 तक के प्रतिभागियों को 1100 के आध्यात्मिक पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। रैंक 114 से 991 तक मेरिट प्रमाणपत्र दिए जाएंगे।
पुरस्कार वितरण समारोह 24 मई 2026, रविवार को गुप्त वृंदावन धाम, जयपुर में आयोजित होगा। विजेताओं को गुप्त वृंदावन धाम द्वारा विशेष हेरिटेज जयपुर यात्रा एवं आध्यात्मिक सत्संग का अवसर भी प्राप्त होगा।
कार्यक्रम समन्वयक एवं मीडिया प्रवक्ता सिद्धस्वरूप दास ने बताया कि आज पूरे देश में बंगाल की चर्चा हो रही है और उसी पावन भारत भूमि के बंगाल प्रांत से संस्थापक आचार्य श्रील प्रभुपाद जी ने भारत की वैदिक संस्कृति एवं सनातन धर्म का संदेश लेकर विदेश यात्रा प्रारम्भ की थी।
श्रील प्रभुपाद जी का जन्म कोलकाता में हुआ, वहीं उन्होंने शिक्षा प्राप्त की तथा स्वतंत्रता आंदोलन के समय नेताजी सुभाषचंद्र बोस के साथ कॉलेज में अध्ययन किया। बाद में उन्होंने श्री चैतन्य महाप्रभु की शिक्षाओं एवं भगवद्गीता के संदेश को विश्वभर में पहुँचाने का महान कार्य किया।
गौरतलब है कि श्री चैतन्य महाप्रभु, जिन्होंने हरिनाम संकीर्तन आंदोलन को विश्वव्यापी प्रेरणा दी, उनकी दिव्य लीला भूमि मायापुर (बंगाल) से ही भक्ति एवं गीता प्रचार का यह आन्दोलन प्रारम्भ हुआ, जो आज श्रील प्रभुपाद जी की प्रेरणा से पूरे विश्व में फैल चुका है।
गुप्त वृंदावन धाम द्वारा पिछले लगभग पाँच वर्षों से स्कूल ऑफ गीता यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रतिदिन ऑनलाइन गीता एवं भागवत अध्ययन की कक्षाएँ भी संचालित की जा रही हैं, जिनसे देश-विदेश के अनेक विद्यार्थी, युवा एवं परिवार नियमित रूप से जुड़ रहे हैं। इन ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से हजारों लोगों तक भगवद्गीता का संदेश पहुँच रहा है तथा अनेक लोग नियमित साधना, जप एवं आध्यात्मिक जीवन से जुड़ रहे हैं।



















