माटी कला राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा : टाक

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Clay art is an integral part of Rajasthan's rich cultural heritage: Tak
Clay art is an integral part of Rajasthan's rich cultural heritage: Tak

जयपुर। श्रीयादे माटी कला बोर्ड, राजस्थान के गवर्निंग बोर्ड की महत्वपूर्ण बैठक मंगलवार को उद्योग भवन स्थित बोर्ड रूम में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता बोर्ड अध्यक्ष प्रहलाद राय टाक ने की। बैठक में माटी कला से जुड़े कारीगरों के उत्थान, उनके कौशल संवर्धन और विपणन के अवसरों को बढ़ाने को लेकर कई अहम प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक के दौरान राज्य में परंपरागत आवा-कजावा (माटी कला) के संरक्षण, कारीगरों की आजीविका में वृदि्ध, ग्रामीण रोजगार सृजन, पर्यावरण अनुकूल उत्पादन प्रणाली को बढावा देने एवं राज्य की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ करने के उदेश्य से आवा-कजावा प्रोत्साहन नीति बनाए जाने को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ।

इसी तरह उद्योग भवन में माटी कला की विभिन्न विधाओं एवं कलाकृतियों के सजीव प्रदर्शन (लाइव डेमोंस्ट्रेशन) के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। बोर्ड का मानना है कि इससे न केवल आमजन को पारंपरिक कला से जुड़ने का अवसर मिलेगा, बल्कि कारीगरों को भी अपनी कला का प्रदर्शन कर सीधे बाजार से जुड़ने का मंच मिलेगा।

इसके अलावा माटी कामगारों को श्रमिक श्रेणी में शामिल कर श्रमिक कार्ड जारी करने का प्रस्ताव भी रखा गया, जिससे उन्हें सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, बीमा, पेंशन एवं अन्य सरकारी लाभों का सीधा फायदा मिल सके। यह कदम कारीगरों की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बैठक में माटी कला से जुड़े कलाकारों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए पांच हजार इलेक्ट्रिक चाक और मिट्टी गूंथने की मशीनें उपलब्ध कराने पर भी विचार-विमर्श हुआ। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और कारीगरों का श्रम कम होगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि की संभावना है।

विपणन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यूनिटी मॉल में माटी कला उत्पादों के लिए स्थान उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी चर्चा में रहा। इससे कारीगरों को अपने उत्पादों के लिए स्थायी बाजार मिलेगा और उनके हस्तशिल्प को व्यापक पहचान मिल सकेगी।

साथ ही, माटी कला के विकास के लिए बिचून में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने हेतु भूमि आवंटन के विषय पर भी गंभीरता से विचार किया गया। यह केंद्र प्रशिक्षण, अनुसंधान और नवाचार का प्रमुख हब बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होगा।

बैठक को संबोधित करते हुए बोर्ड अध्यक्ष प्रहलाद राय टाक ने कहा कि माटी कला राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है, जिसे संरक्षित और प्रोत्साहित करना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कारीगरों के कल्याण और उनकी कला को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बैठक में उठाए गए सभी प्रस्तावों पर शीघ्र कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, ताकि माटी कला से जुड़े हजारों परिवारों को इसका सीधा लाभ मिल सके। टाक ने यह भी कहा कि पारंपरिक कला को आधुनिक बाजार से जोड़ना ही कारीगरों के आर्थिक सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी माध्यम है।

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