जयपुर। नीट परीक्षा 2026 के पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। मीडिया से बातचीत में गहलोत ने कहा कि यह समझ से परे है कि परीक्षा 3 मई को होने के बाद छात्रों ने 3 और 4 मई को ही पुलिस को शिकायत दी, लेकिन एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि छात्रों द्वारा एनटीए को शिकायत भेजे जाने के बाद ही मामला गंभीरता से लिया गया और बाद में एसओजी को जांच सौंपी गई। गहलोत ने आरोप लगाया कि कार्रवाई में देरी के कारण राजस्थान और एसओजी दोनों की बदनामी हुई।
गहलोत ने कहा कि लगातार तीसरे वर्ष नीट परीक्षा में पेपर लीक की घटनाएं सामने आ रही हैं। वर्ष 2024, 2025 और अब 2026 में भी पेपर आउट होने से एनटीए की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। उन्होंने कहा कि देशभर में पेपर लीक के संगठित गिरोह सक्रिय हैं, जिससे युवाओं का प्रतियोगी परीक्षाओं से भरोसा उठता जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान में भी पूर्व में पेपर लीक के मामले सामने आए थे, लेकिन उस समय तुरंत एफआईआर दर्ज कर परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित कराई गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार की “नेगेटिव अप्रोच” के कारण मामले को दबाने का प्रयास किया गया।
उन्होंने कहा कि एनटीए ने बिना एफआईआर दर्ज हुए ही परीक्षा रद्द कर दी, इससे साफ है कि एजेंसी के पास ठोस सबूत पहुंचे होंगे। ऐसे में सवाल उठता है कि राजस्थान सरकार और एसओजी तक वही तथ्य क्यों नहीं पहुंचे।
गहलोत ने केंद्र सरकार से मांग की कि पेपर लीक मामलों की गहराई से जांच कर राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय गिरोहों का पर्दाफाश किया जाए। उन्होंने कहा कि सेना, न्यायपालिका और विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में भी पेपर लीक की घटनाएं सामने आ रही हैं, इसलिए इस समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है।
उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से जवाब मांगते हुए कहा कि देश को बताया जाए कि आखिर बार-बार पेपर लीक क्यों हो रहे हैं। गहलोत ने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।



















