जयपुर। श्री भाटिया बिरादरी प्रबंध समिति की ओर से आयोजित 108 श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस पर श्री गोकुल धाम के आचार्य सुरेश जी शास्त्री ने भरत चरित्र, अजामिल उपाख्यान, चतुःश्लोकी भागवत एवं भगवान नृसिंह अवतार की कथाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा।
शास्त्री ने भरत चरित्र के माध्यम से बताया कि साधना के मार्ग में किसी भी प्रकार की आसक्ति मनुष्य को भगवान से दूर कर सकती है। वहीं अजामिल प्रसंग में भगवान के नाम की महिमा बताते हुए कहा कि कलयुग में भगवान का नाम ही सबसे बड़ा सहारा है।
नृसिंह अवतार प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए किसी भी रूप में प्रकट हो सकते हैं। जैसे ही भगवान नृसिंह के प्रकट होने का प्रसंग आया, पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा।
समिति अध्यक्ष अजय गांधी ने बताया कि समिति द्वारा संचालित भाटिया अस्पताल में फिजियोथैरेपी, रक्त एवं अन्य जांचें कम दरों पर उपलब्ध कराई जाती हैं। उपाध्यक्ष नितिन भाटिया ने बताया कि प्रतिदिन सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक 108 ब्राह्मण मूल पाठ करते हैं तथा दोपहर 3:30 बजे से रात्रि 8:30 बजे तक कथा होती है। कथा की पूर्णाहुति 23 मई को होगी।



















