जयपुर। पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला महापर्व गंगा दशहरा यानी ‘गंगा दशमी’ इस साल 25 मई, सोमवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। ज्योतिषविदों के अनुसार, गंगा दशमी का दिन एक स्वयं सिद्ध अबूझ मुहूर्त होता है, जिसमें बिना कोई पंचांग देखे सभी प्रकार के मांगलिक और शुभ कार्य संपन्न किए जा सकते हैं।
पंडित राजेश कुमार शर्मा ने इस पर्व का धार्मिक महत्व बताते हुए कहा कि गंगा दशहरा को ‘गंगावतरण दिवस’ के रूप में भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी अत्यंत शुभ तिथि पर भगीरथ की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा स्वर्ग से राजा शांतनु और पूर्वजों के उद्धार के लिए धरती पर अवतरित हुई थीं। इस पावन दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, दीपदान करने और पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं और घर में सुख-समृद्धि व शांति बनी रहती है।
गंगा दशमी के दिन पवित्र तीर्थों या मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन किसी पवित्र नदी, घाट या घर के ही मंदिर में मिट्टी के 10 दीपक जलाने का विशेष विधान है। इसके साथ ही, इस दिन जरूरतमंद व्यक्तियों को शीतलता प्रदान करने वाली वस्तुओं का दान महापुण्य फलदायी माना गया है। श्रद्धालु इस दिन पानी से भरा मिट्टी का घड़ा, खरबूजा और आम, गुड़, तिल और अन्न सत्तू, सुवर्ण (सोना) और हाथ का पंखा दान कर पुण्य कमा सकते हैं।
गंगा स्नान एवं पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त: सुबह 05:34 बजे से 07:16 बजे तक,केवल पूजा-अर्चना का शुभ मुहूर्त: सुबह 8:58 बजे से 10:39 बजे तक। राजधानी जयपुर सहित प्रदेशभर के प्रमुख मंदिरों और गलता तीर्थ में इस दिन विशेष महाआरती और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा, जिसकी तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी हैं।



















