जयपुर। नगर निगम मुख्यालय में शुक्रवार सुबह कार्मिक शाखा कार्यालय में अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आग बुझाने के लिए कर्मचारियों ने कार्यालय में लगे अग्निशमन उपकरणों का इस्तेमाल किया। लेकिन अधिकांश उपकरण समय पर काम नहीं कर पाए। काफी मशक्कत के बाद कर्मचारियों ने आग पर काबू पाया। आग से कार्यालय में रखा फर्नीचर और कुछ महत्वपूर्ण फाइल्स जलकर क्षतिग्रस्त हो गईं।
घटना ने निगम के अग्निशमन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहरभर में फायर एनओसी जारी करने और अग्निशमन उपकरणों की जांच करने वाला विभाग खुद अपने मुख्यालय में एक्सपायरी डेट के उपकरण लगाए बैठा था। जानकारी के अनुसार निगम मुख्यालय में लगे अग्निशमन उपकरणों को मई 2025 में रिफिल किया गया था और उनकी वैधता 30 अप्रैल 2026 तक थी। यानी उपकरण 22 दिन पहले ही एक्सपायर हो चुके थे।
इसके बावजूद इन्हें बदलने या दोबारा रिफिल कराने की दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई। खास बात यह है कि अग्निशमन विभाग के अधिकारी भी इसी मुख्यालय में बैठते हैं, लेकिन उपकरणों की नियमित जांच को लेकर लापरवाही बरती गई। इस घटना के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि जब निगम मुख्यालय में ही अग्निशमन उपकरणों की स्थिति ऐसी है तो शहर के अन्य संस्थानों और व्यावसायिक भवनों की सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी होगी।
शहरभर में होटल, दुकान, बैंक, संस्थान, उद्योग और अन्य व्यावसायिक भवनों को फायर एनओसी जारी करने की जिम्मेदारी अग्निशमन विभाग की है, लेकिन विभाग के पास यह तक स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं है कि कितने भवन बिना फायर एनओसी के संचालित हो रहे हैं। कई स्थानों पर बिना अनुमति व्यवसाय चल रहे हैं। जबकि अग्निशमन उपकरणों की नियमित जांच भी नहीं हो रही।
हाल ही में विश्वकर्मा क्षेत्र सहित शहर के कई हिस्सों में फैक्ट्रियों,दुकानों और मकानों में आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें लाखों रुपए का सामान जलकर नष्ट हो गया। जांच में कई स्थानों पर फायर एनओसी नहीं होना और कहीं एक्सपायरी अग्निशमन उपकरण पाए जाने की बात सामने आई थी। इसके बावजूद विभाग की कार्यशैली में सुधार नजर नहीं आ रहा।
इस संबंध में अग्निशमन विभाग के सीएफओ गौत्तम लाल ने कहा कि अग्निशमन उपकरणों को रिफिल कराने के लिए फाइल प्रक्रिया में है। उन्होंने कहा कि उपकरणों में एक्सपायरी जैसी कोई बात नहीं होती। मुख्य रूप से उनका प्रेशर सही होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि कई उपकरणों को शुक्रवार को ही रिफिल के लिए भेजा गया है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि निगम कार्यालय में लगी आग इन्हीं उपकरणों की सहायता से बुझाई गई। हालांकि उपकरणों की रिफिलिंग की अंतिम तिथि 30 अप्रैल थी।



















