जयपुर। सीकर रोड स्थित मणिपाल हॉस्पिटल जयपुर में डॉक्टरों की टीम ने एक जटिल वैस्कुलर सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर मरीज का पैर बचाने में सफलता हासिल की। समय पर किए गए एंडोवेस्कुलर उपचार से गंभीर स्थिति में पहुंच चुकी मरीज को राहत मिली और अब वह सामान्य रूप से चलने लगी हैं।
हॉस्पिटल प्रशासन के अनुसार खातुम बानू को उनके बाएं पैर में अचानक ब्लड सप्लाई रुक जाने के कारण तेज दर्द की शिकायत हुई थी। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि पैर की उंगलियां नीली और काली पड़ने लगी थीं, जो “क्रिटिकल लिम्ब इस्कीमिया” का संकेत था। मरीज को तत्काल अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया, जहां सीटी एंजियोग्राफी जांच की गई।
जांच में सामने आया कि पैर बचने की संभावना बेहद कम थी। इसके बाद वैस्कुलर सर्जन डॉ. गोविन्द प्रसाद दुबे ने परिजनों को स्थिति की गंभीरता से अवगत कराते हुए तत्काल ऑपरेशन की आवश्यकता बताई। डॉक्टर्स की टीम ने एंडोवेस्कुलर तकनीक से उपचार करने का निर्णय लिया। उपचार प्रक्रिया के तहत 25 तारीख को ब्लॉकेज (क्लॉट) की लाइसिस प्रक्रिया शुरू की गई। अगले दिन क्लॉट को सफलतापूर्वक हटाकर एंजियोप्लास्टी की गई, जिससे पैर में दोबारा ब्लड सप्लाई शुरू हो गई।
डॉ. गोविन्द प्रसाद दुबे ने बताया कि वर्तमान में मरीज की स्थिति पहले से काफी बेहतर है। पैर में रक्त प्रवाह सामान्य हो चुका है और उंगलियों का रंग भी सुधर रहा है। उन्होंने बताया कि सबसे बड़ी सफलता यह रही कि मरीज का पैर बच गया। अब मरीज अपने पैरों से चलने लगी हैं और दर्द में भी काफी राहत है।
उन्होंने कहा कि यह मामला दर्शाता है कि समय पर सही एंडोवेस्कुलर उपचार मिलने पर गंभीर स्थिति में भी मरीज के अंग को बचाया जा सकता है।



















