ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर साइबर ठगी का भंडाफोड़, गिरोह के तीन शातिर ठग गिरफ्तार

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जयपुर। रामनगरिया थाना पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन शातिर आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपित सोशल मीडिया और ऑनलाइन पोर्टलों के माध्यम से युवाओं को घर बैठे मोटी कमाई का लालच देकर अपने जाल में फंसाते थे और गेम में जीतने वाले खिलाड़ियों की आईडी ब्लॉक कर उनकी रकम हड़प लेते थे।

इस कार्रवाई में पुलिस ने साइबर फ्रॉड में प्रयुक्त लैपटॉप, टैबलेट, मोबाइल फोन, सिम कार्ड, डेबिट कार्ड, चेक बुक और अन्य दस्तावेज भी जब्त किए हैं। फिलहाल पुलिस आरोपितों से पूछताछ करने में जुटी है।

पुलिस उपायुक्त (जयपुर पूर्व) रंजीता शर्मा ने बताया कि रामनगरिया थाना पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह के शातिर ठग सुरेश कुमार (24) निवासी धोलीपाल जिला हनुमानगढ़, संजय उर्फ संजू (24) निवासी रोझां जिला श्रीगंगानगर तथा जगदीश राम (35) निवासी रावतका जिला झुंझुनूं को गिरफ्तार किया है। वहीं जांच के दौरान हरफूल यादव, राजेंद्र कुमार रुलानियां और विजेंद्र कुमार नामक आरोपितों की भूमिका भी सामने आई है। जिनकी संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।

पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से एक लैपटॉप, एक टैबलेट, पांच एंड्रॉयड मोबाइल फोन, आठ सिम कार्ड, पांच डेबिट कार्ड, दो चेक बुक, बैंक खातों की जानकारी वाले दस्तावेज, हिसाब-किताब से जुड़े रजिस्टर तथा एक वाई-फाई राउटर जब्त किया है।
रामनगरिया थानाधिकारी चन्द्रभान ने बताया कि तकनीकी विश्लेषण और मुखबिर सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने जगतपुरा स्थित चन्द्र विला रेजीडेंसी में दबिश देकर आरोपितों को गिरफ्तार किया। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपित सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को ऑनलाइन गेमिंग आईडी से मोटी कमाई का लालच देते थे।

इसके बाद उन्हें विभिन्न वेबसाइटों और पोर्टलों पर जोड़कर रुपए के बदले डिजिटल कॉइन उपलब्ध कराए जाते थे और गेम खेलने के लिए प्रेरित किया जाता था। ऑनलाइन गेमिंग के दौरान हारने वाले खिलाड़ियों की रकम गिरोह के पास चली जाती थी, जबकि यदि कोई खिलाड़ी जीत जाता था तो उसकी गेमिंग आईडी ब्लॉक कर दी जाती थी और जीती हुई राशि का भुगतान नहीं किया जाता था।

इस तरह आरोपी जीतने और हारने वाले दोनों प्रकार के खिलाड़ियों से ठगी कर रहे थे। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग लोगों के नाम से जारी सिम कार्ड और बैंक खातों का उपयोग करते थे। इन खातों के माध्यम से लेन-देन कर साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर किया जाता था।

पुलिस अब गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ कर रही है। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह गिरोह राजस्थान के अलावा अन्य राज्यों में भी सक्रिय था। पुलिस पूरे नेटवर्क, बैंक खातों, फर्जी सिम कार्डों और अन्य सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस का मानना है कि पूछताछ में साइबर ठगी के कई और मामलों का खुलासा हो सकता है।

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