प्रयोगशाला सहायक भर्ती घोटाला:ओएमआर शीट में हेरफेर कर नौकरी पाने वाले गिरफ्तार

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Laboratory Assistant Recruitment Scam: Individuals arrested for securing jobs by manipulating OMR sheets.
Laboratory Assistant Recruitment Scam: Individuals arrested for securing jobs by manipulating OMR sheets.

जयपुर। राजस्थान में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में धांधली करने वाले गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (एसओजी) ने प्रयोगशाला सहायक सीधी भर्ती परीक्षा-2018 में हुए ओएमआर शीट फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा किया है। एसओजी ने फर्जी तरीके से अंक बढ़वाकर चयन सूची में शामिल हुए दो अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि जिन अभ्यर्थियों के वास्तविक अंक महज 2 और 4 थे, उन्हें ओएमआर शीट में हेरफेर कर 165 और 191 अंक दिलाकर चयनित करा दिया गया था।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एसओजी) विशाल बंसल ने बताया कि प्रयोगशाला सहायक सीधी भर्ती परीक्षा-2018 से जुड़े मामले में एसओजी थाना में प्रकरण दर्ज कर जांच की जा रही है। अनुसंधान के दौरान पता चला कि परीक्षा की ओएमआर शीट स्कैनिंग का कार्य करने वाली अधिकृत एजेंसी राभव लिमिटेड के कार्मिकों ने अभ्यर्थियों से मिलीभगत कर बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा किया था।

जांच में सामने आया कि एजेंसी के कार्मिक विनोद कुमार गौड़ और शादान खान ने कुल 27 अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट में अनुचित तरीके से कांट-छांट कर उनके अंक बढ़ा दिए और उन्हें अनंतिम चयन सूची में शामिल करवा दिया। एसओजी इस मामले में पहले ही विनोद कुमार गौड़, शादान खान तथा कंपनी के कार्यकारी निदेशक रामप्रवेश सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।

एसओजी के अनुसार राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा संदेह के आधार पर मूल ओएमआर शीटों की दोबारा स्कैनिंग करवाई गई, जिसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
जांच में पाया गया कि करौली जिले के टोडाभीम थाना क्षेत्र के गांव नांगललाट निवासी महेन्द्र कुमार मीना (31) के प्राप्तांक स्कैनिंग के दौरान बढ़ाकर 165 अंक दर्शा दिए गए थे। जबकि मूल ओएमआर शीट की पुनः स्कैनिंग में उसके वास्तविक अंक मात्र 4 पाए गए।

वहीं दौसा जिले के मंडावर थाना क्षेत्र के ग्राम नादना निवासी देवेन्द्र सिंह गुर्जर (28) के अंक स्कैनिंग के दौरान बढ़ाकर 191 दर्शाए गए थे। पुनः जांच में उसके वास्तविक अंक केवल 2 पाए गए। एसओजी ने लगातार तलाश के बाद दोनों वांछित अभ्यर्थियों को गिरफ्तार कर एसओजी मुख्यालय में पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अंक बढ़वाने के लिए आरोपियों ने एजेंसी के कार्मिकों और अधिकारियों को कितनी राशि का भुगतान किया था।

एसओजी के अनुसार इस फर्जीवाड़े के जरिए अनंतिम रूप से चयनित हुए अन्य 25 संदिग्ध अभ्यर्थियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। उनकी तलाश में टीमों द्वारा विभिन्न स्थानों पर दबिश दी जा रही है और जल्द ही अन्य गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
एसओजी का मानना है कि यह मामला केवल दो अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है,बल्कि भर्ती परीक्षा में संगठित तरीके से किए गए बड़े फर्जीवाड़े का हिस्सा है। मामले की गहन जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है।

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