140 भक्त एकसमान वेशभूषा में करेंगे ‘ब्रह्म दर्शनी पाठ

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जयपुर। आस्था और भक्ति के पावन केंद्र श्री अमरापुर स्थान जयपुर में आचार्य सद्गुरु स्वामी टेऊँराम महाराज का पावन चालिहा महोत्सव पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। आगामी 140वें जन्मोत्सव की खुशी में यहाँ विभिन्न झांकी और प्रतियोगिताओं का भव्य आयोजन किया जा रहा है साथ ही विजेताओं को पुरस्कृत भी किया जा रहा है।

शनिवार और योगिनी एकादशी के पावन अवसर पर आचार्य श्री सद्गुरु स्वामी टेऊँराम महाराज के श्री विग्रह के समक्ष पहली बार 140 तुलसी पौधों की भव्य एवं अलौकिक झांकी सजाई गई, जो सभी भक्तों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र रही।

इस अवसर पर संतों ने एकादशी पर तुलसी पूजन का महत्व बताते हुए कहा कि योगिनी एकादशी पर भगवान विष्णु का स्मरण और तुलसी पूजन अति उत्तम माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करने से पूजा का फल अनेक गुना बढ़ जाता है। इस अनूठी झांकी के माध्यम से अमरापुर स्थान द्वारा समाज को पर्यावरण संरक्षण का एक बेहद खूबसूरत और सकारात्मक संदेश भी दिया गया।

महोत्सव के दौरान बच्चों और बड़ों की प्रतिभा को निखारने के लिए कई प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिनमें विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। शनिवार को आचार्य के सम्मुख 140 सुराइयों की भव्य झांकी सजाई गई। इस प्रतियोगिता में लगभग 120 भक्तों ने सुंदर सुराइयाँ सजाकर भाग लिया। इस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हिमांशी कावानी को मिला। वहीं द्वितीय स्थान दर्शिता गोलानी को प्राप्त हुआ।

तृतीय स्थान दर्पण उत्तमचंदानी को मिला। इसी के साथ 13 प्रतियोगियों को प्रशंसनीय पुरस्कार भी प्रदान किए गए। सायंकाल आचार्य सद्गुरु स्वामी टेऊँराम महाराज के जीवन वृत्त पर आधारित एक मौखिक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें सभी आयु वर्ग के भक्तों ने हिस्सा लिया। सही उत्तर देने वाले श्रद्धालुओं को संतों ने मंच पर ही पुरस्कृत किया ।

1 से 10 वर्ष तक के बच्चे बाबा स्वामी टेऊँराम का सुंदर और मनमोहक बाल स्वरूप धारण कर पहुंचे। सबसे सुंदर स्वरूप बनने वाले बालक को संतों ने चांदी का लॉकेट उपहार स्वरूप दिया गया। प्रतियोगिता में शामिल अन्य सभी बच्चों को भी उपहार और प्रसाद वितरित किया गया।

आचार्य के 140वें जन्मोत्सव की श्रृंखला में 12 जुलाई रविवारशाम 4:30 बजे से 6:30 बजे तक एक विशाल सामूहिक ब्रह्म दर्शनी पाठ का आयोजन किया जाएंगा। इस पाठ में संत-महात्माओं सहित 140 भक्त एक जैसी वेशभूषा धारण कर सहभागिता करेंगे।

संतों ने इस पाठ की महिमा बताते हुए कहा कि जिस प्रकार रामायण का मुख्य अंश सुंदरकांड है, ठीक उसी प्रकार सदगुरु स्वामी टेऊँराम महाराज द्वारा रचित ‘श्री प्रेम प्रकाश ग्रंथ साहिब’ का परम अंश ‘ब्रह्मदर्शनी’ है। इसके पाठ से अंतरात्मा में शांति का भाव जागृत होता है और ब्रह्म के साक्षात दर्शन होते हैं।

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