जयपुर। जुलाई माह धार्मिक दृष्टि से विशेष रहेगा। इस दौरान रवि प्रदोष, मासिक शिवरात्रि, भौमवती अमावस्या, गुप्त नवरात्रि, वरदा चतुर्थी, देवशयनी एकादशी और गुरु पूर्णिमा जैसे प्रमुख पर्व मनाए जाएंगे।
पंडित बनवारी लाल शर्मा ने बताया कि आषाढ़ माह में आने वाले व्रत एवं पर्व विशेष पुण्यदायी माने जाते हैं और श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। उन्होंने बताया कि 12 जुलाई को मासिक शिवरात्रि और प्रदोष व्रत एक ही दिन पड़ने से दुर्लभ संयोग बन रहा है। रविवार को प्रदोष व्रत होने के कारण इसे रवि प्रदोष कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव की आराधना करने से सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
14 जुलाई को भौमवती अमावस्या मनाई जाएगी। मंगलवार होने के कारण इस दिन मंगल ग्रह की शांति के लिए पूजा का विशेष महत्व है। पितृ दोष और मंगल दोष की शांति के लिए पीपल की परिक्रमा तथा तिल के तेल का दीपक जलाना शुभ माना गया है।
15 जुलाई से आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ होगा। नौ दिनों तक देवी की दस महाविद्याओं की साधना और पूजा-अर्चना की जाएगी। पं. विद्रोही के अनुसार, गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से तंत्र साधना करने वाले साधकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
17 जुलाई को भगवान गणेश को समर्पित वरदा चतुर्थी मनाई जाएगी। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं तथा सफलता, विवेक और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
25 जुलाई को देवशयनी एकादशी का पर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन से भगवान विष्णु चार माह के योगनिद्रा काल में प्रवेश करते हैं। इस व्रत के प्रभाव से पापों का नाश होता है, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
माह का समापन 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के साथ होगा। इसे व्यास पूर्णिमा और वेद व्यास जयंती भी कहा जाता है। इसी दिन महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था। उन्होंने वेदों का संकलन एवं वर्गीकरण करने के साथ महाभारत और श्रीमद्भागवत जैसे महान ग्रंथों की रचना की। इस अवसर पर श्रद्धालु अपने गुरुजनों के प्रति श्रद्धा व्यक्त कर उनका पूजन करेंगे।



















