कड़ी सुरक्षा के बीच हुई महिला सुपरवाइजर भर्ती परीक्षा

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जयपुर। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से शुक्रवार को महिला एवं बाल विकास विभाग में महिला सुपरवाइजर (पर्यवेक्षक महिला) सीधी भर्ती परीक्षा-2026 शांतिपूर्ण एवं कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच आयोजित की गई। विभाग के 72 पदों के लिए आयोजित परीक्षा में 1 लाख 21 हजार 478 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। इनमें से 82 हजार 882 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी, जबकि 38 हजार 596 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे। परीक्षा में 68.23 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की गई।

हाल के नीट पेपर लीक प्रकरण के बाद भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर बढ़ी सतर्कता के बीच परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। परीक्षा केंद्रों में प्रवेश से पहले अभ्यर्थियों की गहन जांच की गई। मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ डिवाइस सहित सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध रहा। अभ्यर्थियों को परीक्षा शुरू होने से एक घंटा पहले केंद्र पर पहुंचने के निर्देश दिए गए थे तथा निर्धारित समय के बाद पहुंचे अभ्यर्थियों को प्रवेश नहीं दिया गया।

राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के अध्यक्ष मेजर जनरल आलोक राज ने बताया कि परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई। परीक्षा केंद्रों के मुख्य द्वार पर पुलिस द्वारा फ्रिस्किंग कराई गई और मेटल डिटेक्टर से जांच की गई। इसके बाद अभ्यर्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन और फेस रिकॉग्निशन तकनीक के माध्यम से पहचान सुनिश्चित की गई। परीक्षा कक्षों में भी लगातार निगरानी रखी गई ताकि कोई प्रतिबंधित सामग्री भीतर न ले जा सके।

जयपुर के एक परीक्षा केंद्र के केंद्रीय अधीक्षक दिलीप कुमार शर्मा ने बताया कि डमी अभ्यर्थियों पर रोक लगाने के लिए त्रिस्तरीय सत्यापन व्यवस्था लागू की गई। अभ्यर्थियों से हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में हस्तलिखित नमूने भी लिए गए, ताकि नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की फर्जीवाड़े की संभावना समाप्त की जा सके।

परीक्षा के दौरान कुछ महिला अभ्यर्थियों के आधार कार्ड में फोटो अपडेट नहीं होने के मामले भी सामने आए। ऐसे अभ्यर्थियों से अंडरटेकिंग लेकर अतिरिक्त पहचान सत्यापन किया गया और इसके बाद ही उन्हें परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी गई।
बोर्ड ने दावा किया कि आधुनिक तकनीक, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था, बायोमेट्रिक सत्यापन और फेस रिकॉग्निशन जैसी व्यवस्थाओं के जरिए भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाए रखने का प्रयास किया गया, ताकि केवल पात्र अभ्यर्थियों को ही अवसर मिल सके।

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