जयपुर। हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत जगत के पालनहार भगवान विष्णु की उपासना के लिए विशेष महत्व रखता है। श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष कामिका एकादशी 9 अगस्त रविवार को मनाई जाएगी।
आचार्य गौरी शंकर शर्मा बोरखेड़ा के अनुसार, इस बार कामिका एकादशी का व्रत द्विपुष्कर योग और राज योग के अत्यंत शुभ संयोग में पड़ रहा है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और श्री हरि की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है और भगवान विष्णु का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
पंडित राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि कामिका एकादशी पर पूजा का सबसे उत्तम समय सुबह 7 बजकर 34 मिनट से दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। एकादशी के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें। भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र पर पीले पुष्प, धूप, दीप, फल, नैवेद्य और तुलसी दल अर्पित करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का निरंतर जप करें।
तत्पश्चात कामिका एकादशी की व्रत कथा का श्रवण करें और अंत में घी के दीपक से आरती करें। शाम के समय अपने घर के आंगन या बालकनी में स्थित तुलसी के पौधे के पास गाय के शुद्ध घी का एक दीपक अवश्य जलाएं। व्रत का पारण अगले दिन (द्वादशी तिथि को) शुभ समय पर किया जाएगा।


















