केसर-अगरू से रंगी पवित्रा मालाओं से सजे ठाकुर जी: गोविंददेवजी मंदिर में भक्ति की बही धारा

0
28
Thakur-ji adorned with sacred garlands scented with saffron and agarwood.
Thakur-ji adorned with sacred garlands scented with saffron and agarwood.

जयपुर। ठिकाना मंदिर श्री गोविंद देव जी महाराज जयनिवास बाग में मंगलवार को श्रावण शुक्ल द्वादशी के अवसर पर ‘पवित्रा समर्पण’ का पावन पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इसी अवसर पर मंदिर के श्रीविग्रह प्राकट्य कर्ता एवं परम आचार्य श्रील रूप गोस्वामी का तिरोभाव उत्सव भी भक्ति भाव से मनाया गया।

मंदिर के सेवा अधिकारी मानस गोस्वामी के अनुसार मंदिर के महंत एवं एकल प्रन्यासी अंजन कुमार गोस्वामी के सान्निध्य में धूप आरती से पूर्व ठाकुरजी को केसर, अगरू और गोरोचन आदि से रंगी पवित्रा मालाएं धारण कराई गईं। इसके साथ ही ठाकुरजी को रेशमी, कच्चे सूत, सुनहरी तथा विशेष 108 गांठ वाली पवित्रा मालाएं अर्पित की गईं। इस अवसर पर ठाकुर श्रीजी को मीठी मठरी का विशेष भोग लगाया गया।

श्रील रूप गोस्वामी जी को कलियुग के पावन अवतार श्री चैतन्य महाप्रभु का प्रिय शिष्य माना जाता है। उन्होंने मानव मात्र के कल्याण के लिए भक्ति से जुड़े अनेक शास्त्रों की रचना की। उनके प्रमुख ग्रंथों में ‘भक्तिरसामृतसिन्धु’ और ‘उज्ज्वल नीलमणि’ शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने अनेक नाटकों और काव्यों की भी रचना की।

श्रील रूप गोस्वामी जी की प्रमुख सेवाओं में वृंदावन में श्री गोविंद देवजी के श्रीविग्रह का प्राकट्य कर उनकी विधिवत पूजा-अर्चना की परंपरा स्थापित करना बताया जाता है। वर्तमान में जयपुर में विराजमान श्री रूप सेवित श्री राधा गोविंद देवजी की सेवा श्री रूपानुग गोस्वामी गद्दी विराजमान श्रीमन्माधव गौड़ेश्वराचार्य अंजन कुमार गोस्वामी द्वारा पारंपरिक सेवा पद्धति के अनुसार की गई।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here