जयपुर। भारतीय संगीत जगत के प्रतिष्ठित ग्लोबल इंडियन म्यूजिक एकेडमी अवॉर्ड्स (जीआईएमए) वर्ष 2027 में नए अवतार और नई सोच के साथ वापसी करेगा। विजक्राफ्ट एंटरटेनमेंट एजेंसी ने मंगलवार को आयोजित ‘ऑल अबाउट म्यूजिक’ के 10वें संस्करण में जीआईएमए की वापसी की घोषणा की। नए स्वरूप में जीआईएमए भारतीय संगीत की विविधता को सम्मान देने के साथ नई पीढ़ी के कलाकारों और वैश्विक दर्शकों को जोड़ने पर केंद्रित रहेगा।
कार्यक्रम में संगीत जगत के प्रमुख कलाकारों, रचनाकारों और विशेषज्ञों की मौजूदगी में जीआईएमए के नए अध्याय की शुरुआत हुई। ग्लोबल हिप-हॉप कलाकार राजा कुमारी और चर्चित राजस्थानी लोक गायक-संगीतकार मामे खान ने जीआईएमए ट्रॉफी थामकर इसकी वापसी का प्रतीकात्मक अनावरण किया। इस अवसर पर जीआईएमए के संस्थापक सब्बास जोसेफ, आंद्रे टिमिन्स और विराफ सरकार भी मौजूद रहे।
जीआईएमए के सह-संस्थापक सब्बास जोसेफ ने कहा कि जीआईएमए की स्थापना भारतीय संगीत को अपनी पहचान और समर्पित मंच देने के उद्देश्य से की गई थी। पिछले एक दशक में संगीत के निर्माण, खोज, प्रसार और उपभोग के तौर-तरीकों में व्यापक बदलाव आया है। आज क्षेत्रीय संगीत वैश्विक स्तर पर पहुंच रहा है, वहीं स्वतंत्र कलाकार सीमाओं से परे अपना दर्शक वर्ग तैयार कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बदलते संगीत परिदृश्य के अनुरूप ऐसे मंच की जरूरत है, जो प्रतिभाओं को सामने लाने, उन्हें जोड़ने और उत्कृष्ट संगीत को सम्मानित करने का अवसर दे। 2027 में जीआईएमए की वापसी भारतीय संगीत की विरासत के साथ उसके भविष्य को भी सामने रखेगी।
राजस्थानी लोक गायक एवं संगीतकार मामे खान ने कहा कि जीआईएमए हमेशा उनके लिए ऐसा विशेष मंच रहा है, जहां भारतीय संगीत की विभिन्न आवाजें एक साथ आकर सम्मानित होती हैं। भारत का संगीत किसी एक शैली या भाषा तक सीमित नहीं है। लोक परंपराओं और क्षेत्रीय धुनों से लेकर समकालीन और स्वतंत्र संगीत तक हर आवाज की अपनी कहानी है। उन्होंने जीआईएमए के नए अध्याय का हिस्सा बनने को सम्मान की बात बताते हुए कहा कि भारतीय संगीत को देश के साथ वैश्विक मंच पर भी पहचान मिलनी चाहिए।
ग्रैमी-नामांकित भारतीय-अमेरिकी रैपर, गायिका और गीतकार राजा कुमारी ने कहा कि संगीत की कोई सीमा नहीं होती और भारत की पहचान कभी सिर्फ एक तरह के संगीत से नहीं रही। जीआईएमए का नया स्वरूप पारंपरिक संगीत के साथ नई आवाजों, शैलियों और रचनाकारों को एक साथ लाने का अवसर देगा। यह पहल भारतीय संगीत की विरासत का उत्सव मनाने के साथ उसके भविष्य की दिशा को भी सामने लाएगी।
जीआईएमए की शुरुआत वर्ष 2010 में भारत के विविध संगीत परिदृश्य में उत्कृष्टता को पहचानने और सम्मानित करने के उद्देश्य से हुई थी। इसके मंच पर फिल्म, गैर-फिल्म और पारंपरिक संगीत को एक साथ स्थान दिया गया। छह संस्करणों के बाद अब जीआईएमए बदलते भारतीय संगीत इकोसिस्टम को ध्यान में रखते हुए नए विजन के साथ लौट रहा है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म, स्वतंत्र कलाकारों, क्षेत्रीय संगीत और नई संगीत शैलियों के बढ़ते प्रभाव ने संगीत की खोज और दर्शकों तक पहुंचने के तौर-तरीकों को बदल दिया है। जीआईएमए का नया अवतार इसी बदलाव को प्रतिबिंबित करते हुए भारतीय संगीत की विविधता, प्रतिभा और रचनात्मकता को नई पीढ़ी के सामने लाने के साथ उसे वैश्विक मंच से जोड़ने का प्रयास करेगा।



















