
जयपुर। अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से सावन पूर्णिमा 28 अगस्त को श्रावणी उपाकर्म और रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर शहर के आधा दर्जन से अधिक प्रज्ञा संस्थानों में धार्मिक आयोजन किए जाएंगे। मुख्य आयोजन गायत्री शक्तिपीठ, ब्रह्मपुरी में होगा। यहां श्रावणी उपाकर्म सुबह 7.30 बजे शुरू होगा।
गायत्री शक्तिपीठ के व्यवस्थापक सोहनलाल शर्मा ने बताया कि श्रावणी पर्व के तहत दस विध स्नान के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गायत्री यज्ञ किया जाएगा। साधक आत्मशुद्धि के साथ धार्मिक अनुशासन, सद्विचार और आध्यात्मिक साधना को जीवन में अपनाने का संकल्प लेंगे। श्रावणी पर्व को ऋषि परंपरा, वेदाध्ययन और आत्मशुद्धि से जुड़ा माना जाता है। इस अवसर पर ऋषियों और वैदिक परंपराओं का स्मरण कर जीवन में श्रेष्ठ संस्कार अपनाने का संकल्प लिया जाएगा।
गायत्री चेतना केंद्र मुरलीपुरा की ओर से रामेश्वरधाम कॉलोनी स्थित गौड़ विप्र समाज भवन में श्रावणी उपाकर्म-रक्षाबंधन पर्व का आयोजन होगा। कार्यक्रम सुबह 6 से 7 बजे तक चलेगा। इसमें हेमाद्रि संकल्प, सप्त ऋषि पूजन, वेद पूजन, दस विध स्नान, यज्ञोपवीत परिवर्तन और सामूहिक तर्पण किया जाएगा।
दस विध स्नान में गौदुग्ध, गौघृत, गौमूत्र, गोबर, गौदधि, मिट्टी, भस्म, कुशा, हल्दी और शहद का प्रयोग किया जाएगा। इसके बाद सुबह 7 से 8 बजे तक गायत्री महायज्ञ, रक्षाबंधन और तरू रोपण का आयोजन होगा।
श्रावणी उपाकर्म के कार्यक्रम किरण पथ मानसरोवर स्थित श्री वेदमाता भगवती वेदना निवारण केंद्र, गायत्री शक्तिपीठ वाटिका, गायत्री शक्तिपीठ कालवाड़ और गायत्री चेतना केंद्र जनता कॉलोनी में भी आयोजित होंगे।
इसके अलावा विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों की ओर से गलताजी, आमेर के सागर, मावठा और जयसिंहपुरा खोर में श्रावणी उपाकर्म, हेमाद्रि संकल्प और यज्ञोपवीत परिवर्तन के कार्यक्रम होंगे। इन आयोजनों में सप्त ऋषियों एवं वेदों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ पितरों को तर्पण और जलांजलि अर्पित की जाएगी।


















