जयपुर। संत बाबा उमाकांत महाराज ने सत्संग में कहा कि पहले गुरु पात्रता देखकर नामदान देते थे, लेकिन वर्तमान समय में लोगों के कर्म बिगड़ने के कारण सभी को नामदान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नाम की डोर पकड़कर जीव प्रभु तक पहुंच सकता है।
उन्होंने बताया कि पहले गुरु भक्ति, नामदान, साधना और निजधाम की प्राप्ति चार जन्मों की प्रक्रिया से होती थी। अब नामदान लेने के बाद व्यक्ति पाप कर्मों से बचे, विचार और भावनाएं शुद्ध रखे तथा बताए मार्ग पर चले तो उसे मनुष्य जन्म मिलने की संभावना रहती है।
उन्होंने कहा कि गुरु महाराज ने उत्तर प्रदेश के बांसी से मंच पर नामदान देना शुरू किया था। अब उसी परंपरा के तहत मंच से नामदान दिया जा रहा है।

















