जयपुर। नगर निकाय चुनाव के लिए टिकट वितरण को लेकर भाजपा में रविवार को दिनभर मंथन और खींचतान का दौर चला। जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में प्रत्याशी चयन को लेकर प्रदेश भाजपा मुख्यालय में बैठक प्रस्तावित थी, लेकिन अधिकांश विधायक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों से प्रत्येक वार्ड के लिए केवल एक-एक नाम लेकर पहुंचे। संगठन ने इस पर नाराजगी जताई और बैठक स्थगित कर दी।
इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने सभी विधायकों को निर्देश दिए कि वे रात 8 बजे दोबारा बैठक में शामिल हों और प्रत्येक वार्ड के लिए तीन-तीन संभावित दावेदारों का पैनल लेकर आएं। इसके बाद देर शाम जयपुर के विधायक और संगठन पदाधिकारी संशोधित पैनल के साथ भाजपा मुख्यालय पहुंचने लगे।
एक नाम पर संगठन ने जताई नाराजगी
सूत्रों के अनुसार भाजपा नेतृत्व चाहता है कि टिकट का फैसला किसी एक जनप्रतिनिधि की पसंद या सिफारिश के आधार पर नहीं, बल्कि संगठनात्मक स्तर पर मिले फीडबैक और दावेदारों की तुलना के बाद हो। इसी वजह से विधायकों से प्रत्येक वार्ड के लिए तीन नामों का पैनल मांगा गया है।
इन नामों पर स्थानीय राजनीतिक समीकरण, कार्यकर्ताओं का फीडबैक, दावेदार की संगठन में सक्रियता, सामाजिक प्रतिनिधित्व और चुनाव जीतने की संभावनाओं को लेकर चर्चा होगी। तीन नामों का पैनल तैयार होने से टिकट के लिए दौड़ में शामिल कई दावेदारों की उम्मीदें भी फिर बढ़ गई हैं।
रात 8 बजे फिर शुरू हुआ 150 वार्डों पर मंथन
दिन की बैठक स्थगित होने के बाद विधायकों को रात 8 बजे संशोधित पैनल के साथ बुलाया गया। जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों के प्रत्याशियों का चयन भाजपा के लिए अहम माना जा रहा है। पार्टी के सामने हर वार्ड में सामाजिक समीकरण और स्थानीय राजनीतिक स्थिति के साथ-साथ पुराने कार्यकर्ताओं की दावेदारी तथा संभावित बगावत को भी साधने की चुनौती है। कई वार्डों में एक से अधिक मजबूत दावेदार होने के कारण संगठन अंतिम सूची जारी करने से पहले व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श कर रहा है।
सिविल लाइंस में सुबह कार्यकर्ताओं की नारेबाजी
टिकट वितरण को लेकर रविवार सुबह भाजपा प्रदेश मुख्यालय के बाहर सिविल लाइंस विधानसभा क्षेत्र के कुछ कार्यकर्ताओं ने विरोध-प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि विधायक गोपाल शर्मा और उनके बेटे की ओर से सिविल लाइंस क्षेत्र के 16 वार्डों में कुछ दावेदारों को टिकट का भरोसा दिया गया है।
प्रदर्शनकारियों का दावा था कि इससे लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है। हालांकि, ये आरोप प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं की ओर से लगाए गए हैं और टिकटों पर अंतिम फैसला भाजपा संगठन की आधिकारिक प्रक्रिया के तहत होना है।
पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप
विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं का कहना था कि पार्टी के लिए लंबे समय से सक्रिय लोगों को टिकट चयन में प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनका आरोप था कि यदि पहले से ही कुछ नाम तय कर दिए जाते हैं तो इससे पुराने कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ सकता है।
निकाय चुनाव से पहले भाजपा के सामने टिकट वितरण के साथ-साथ संभावित असंतोष और बगावत को नियंत्रित करने की चुनौती भी है। जयपुर के विभिन्न वार्डों में पूर्व पार्षदों, संगठन पदाधिकारियों और स्थानीय नेताओं ने टिकट के लिए दावेदारी जताई है।
तीन नामों के पैनल से होगी दावेदारों की तुलना
संगठन की ओर से तीन नामों का पैनल मांगने को टिकट चयन प्रक्रिया को अधिक व्यापक और तुलनात्मक बनाने की कवायद माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व इन नामों के साथ स्थानीय फीडबैक और संगठनात्मक रिपोर्ट को आधार बनाकर अंतिम उम्मीदवार तय कर सकता है।
अब भाजपा कार्यकर्ताओं और टिकट के दावेदारों की नजर जयपुर के 150 वार्डों की अंतिम सूची पर है। पार्टी किस चेहरे पर दांव लगाती है और किन दावेदारों को मौका मिलता है, यह आने वाले समय में साफ होगा।



















