जयपुर। साइबर ठग अब डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर सेवानिवृत्त अधिकारियों, डॉक्टरों, प्रोफेसरों और वरिष्ठ नागरिकों की जिंदगीभर की जमा पूंजी पर हाथ साफ कर रहे हैं। ठग खुद को सीबीआई, ईडी, एटीएस, कस्टम, आरबीआई या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर फोन और वीडियो कॉल करते हैं। इसके बाद फर्जी वारंट, सम्मन और नोटिस भेजकर पीड़ित को गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं और कथित वेरिफिकेशन के नाम पर बैंक खातों से रकम ट्रांसफर करवा लेते हैं।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि संदिग्ध पुलिस, न्यायालय अथवा जांच एजेंसी के नोटिस की वास्तविकता जांचने के लिए सीबीआई ने ‘अभय’ पोर्टल शुरू किया है। एआई आधारित यह चैटबॉट संदिग्ध नोटिस और फर्जी वारंट की सत्यता जांचने में सहायता करता है।
आधार-सिम के दुरुपयोग का डर दिखाते हैं
ठग फोन, वाट्सऐप या वीडियो कॉल के जरिए संपर्क कर खुद को एटीएस, सीबीआई, आरबीआई, एनआईए या अन्य एजेंसी का अधिकारी बताते हैं। पीड़ित को कहा जाता है कि उसके आधार कार्ड, बैंक खाते या सिम का इस्तेमाल किसी अवैध गतिविधि में हुआ है। इसके बाद हवाला लेन-देन, आतंकवाद की फंडिंग या मनी लॉन्ड्रिंग में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी दी जाती है।
पीड़ित को सिग्नल, टेलीग्राम या अन्य एप डाउनलोड करवाकर लगातार वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर किया जाता है। इस दौरान उसे परिवार या किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क तक नहीं करने दिया जाता।
फर्जी पुलिस स्टेशन दिखाकर करते हैं भयभीत
वीडियो कॉल पर ठग पुलिस स्टेशन या सीबीआई कार्यालय जैसा सेटअप दिखाते हैं। कई बार वर्दी पहने व्यक्ति भी स्क्रीन पर नजर आता है। इसके बाद वाट्सऐप पर फर्जी गिरफ्तारी वारंट, न्यायालय या आरबीआई के नोटिस भेजे जाते हैं। पीड़ित को यह भी बताया जाता है कि उसके घर के बाहर सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी तैनात हैं।
वेरिफिकेशन के नाम पर पूरी रकम ट्रांसफर
डिजिटल अरेस्ट के दौरान ठग पीड़ित से बचत खाते, एफडी और अन्य वित्तीय संसाधनों की जानकारी हासिल करते हैं। फिर पूरी रकम को अपराध से अर्जित धन बताते हुए कथित वेरिफिकेशन के नाम पर उनके बताए बैंक खाते में ट्रांसफर करवाते हैं। रकम जांच पूरी होने के बाद वापस करने का भरोसा दिया जाता है। पैसा खाते में पहुंचते ही उसे एटीएम, चेक या क्रिप्टोकरेंसी के जरिए दूसरे खातों में भेज दिया जाता है।
डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहती।
ऐसी कॉल आने पर घबराएं नहीं और तुरंत कॉल काट दें। परिवार के सदस्यों को जानकारी दें। अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई एप डाउनलोड न करें और न ही स्क्रीन शेयर करें। आधार, पैन, बैंक खाता, ओटीपी, पिन और पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करें। पुलिस, न्यायालय, सीबीआई या एटीएस के नाम से मिले संदिग्ध नोटिस और वारंट की जांच ‘अभय’ पोर्टल के जरिए की जा सकती है।



















