दशलक्षण महापर्व का सातवां दिन, जैन बन्धुओं ने मनाई सुगन्ध दशमी

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जयपुर। दिगम्बर जैन धर्मावलंबियों के दस दिवसीय दशलक्षण महापर्व के सातवें दिन सोमवार को ‘उत्तम संयम’ धर्म भक्तिभाव और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर राजधानी जयपुर के समस्त दिगम्बर जैन मंदिर प्रभु के जयकारों से गुंजायमान रहे। सायंकाल श्रद्धालुओं ने ‘सुगंध दशमी’ मनाई। अष्ट कर्मों की निर्जरा के लिए मंदिरों में धूपाणों में धूप खेई गई, जिससे संपूर्ण मंदिर परिसर सुगंध से महक उठे।

राजस्थान जैन युवा महासभा के प्रदेश महामंत्री विनोद जैन ‘कोटखावदा’ ने बताया कि प्रातःकाल जैन मंदिरों में श्रीजी के अभिषेक और विश्व शांति की कामना के साथ शांतिधारा संपन्न हुई। इसके पश्चात दशलक्षण विधान मंडल पर अष्ट द्रव्यों से पूजा-अर्चना की गई।

चातुर्मास स्थलों पर संतों ने उत्तम संयम धर्म पर मंगल प्रवचन दिए। संतों ने कहा कि मनुष्य को अपनी पांचों इंद्रियों और मन पर नियंत्रण रखना चाहिए। संयम रूपी रतन की सुरक्षा आवश्यक है, क्योंकि विषय-भोग रूपी चोर इसे चुराने के लिए तत्पर रहते हैं।

जगतपुरा स्थित श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र (शांतिनाथ जी की खोह) में प्रातः अभिषेक व भगवान आदिनाथ की शांतिधारा के बाद विधान पूजा आयोजित हुई। इस मौके पर विनोद जैन कोटखावदा, कमल वैद, सुमत जैन, प्रतीक जैन सहित बड़ी संख्या में महिला व पुरुष श्रद्धालुओं ने अर्घ्य समर्पित किए। वहीं, तारों की कूट स्थित श्री शांतिनाथ मंदिर तथा चित्रकूट कॉलोनी के श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में आचार्य विशद सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में उत्तम संयम पर्व धूमधाम से मनाया गया।

विनोद जैन ने बताया कि मंगलवार, 22 सितंबर को दशलक्षण महापर्व का आठवां धर्म ‘उत्तम तप’ मनाया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस वर्ष तिथि वृद्धि होने के कारण दशलक्षण महापर्व शुक्रवार, 25 सितंबर तक चलेगा, जिसके तहत मंदिरों में रोजाना विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

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