जयपुर। सिंधी समाज के अबूझ सावे बन बधड़ी के अवसर पर बुधवार को न्यू सांगानेर रोड स्थित लाइंस पैराडाइज में भगवान श्री झूलेलाल सेवा समिति, मानसरोवर की ओर से सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किया गया। इसमें 9 जोड़े सनातन धर्म पद्धति और सिंधी रीति-रिवाजों के अनुसार परिणय सूत्र में बंधे। समारोह में सिंधी संस्कृति की छेज, झूमर और पारंपरिक गीतों ने माहौल को उत्सवी बना दिया।
समारोह से पहले दोपहर 2 बजे अग्रवाल फार्म स्थित शीश महल झूलेलाल मंदिर से 9 दूल्हों की बैंड-बाजों के साथ बारात निकली। दूल्हे घोड़ियों पर सवार होकर विवाह स्थल पहुंचे। बारात में गिरधारी संभनानी, लालचंद खानवानी, मूलचंद बसंतानी, प्रमोद नावानी, शोभा बसंतानी, रजनी ग्वालानी और सीमा गोलानी सहित गणमान्य नागरिक शामिल हुए।
पल्लव प्रार्थना के साथ गणेशजी महाराज और भगवान श्री झूलेलाल की आराधना से समारोह शुरू हुआ। पंडित सतीश शर्मा के आचार्यत्व में विद्वान पंडितों ने वैदिक विधि और सिंधी रीति-रिवाजों से विवाह की रस्में कराईं। भगवान भुवन भास्कर और अग्निदेव को साक्षी मानकर 9 जोड़े विवाह बंधन में बंधे। श्री अमरापुर दरबार की संत मंडली, पुरसनाराम मंडल के साईं मुकेश साध, सुंदर ठकुर सहित गणमान्य नागरिकों ने नवदंपतियों को आशीर्वाद दिया।
नवदंपतियों की नई गृहस्थी बसाने के लिए समाजजनों ने विभिन्न उपहार दिए। श्री अमरापुर दरबार की ओर से कन्या को साड़ी, गोवर्धन आसनानी ने स्वर्ण मंगलसूत्र, प्रमोद नावानी ने स्वर्ण अंगूठी, हनी लखवानी ने फ्रिज, नन्दलाल वासुजा ने वाशिंग मशीन, धीरज विशनानी ने ड्रेसिंग टेबल, दीनदयाल वाधवानी ने दूल्हे का सूट और शोभा बसंतानी ने दुल्हन का बेस भेंट किया। इसके अलावा कपड़े, बर्तन और घरेलू उपयोग की अन्य सामग्री भी दी गई।
समन्वयक तुलसी संगतानी ने बताया कि सिंधी समाज में वामन जयंती का विशेष महत्व है और इसे अबूझ सावा माना जाता है। चौमासे में सामान्य विवाह मुहूर्त उपलब्ध नहीं होने पर वामन जयंती के अवसर पर विवाह संस्कार कराने की परंपरा रही है। इसी परंपरा के तहत बन बधड़ी पर सामूहिक विवाह कराया गया। समारोह की व्यवस्थाओं में कन्हैया लाल लखवानी, किशन चंद कुंदनानी, अर्जुन ढोलानी, भागचंद बच्चानी, पम्मन मल सोढानी, केसामल खानवानी सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने सहयोग किया।



















