गुरु प्रदोष और मासिक शिवरात्रि के दुर्लभ संयोग पर शिव मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु

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जयपुर। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर गुरुवार को गुरु प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि का विशेष संयोग बना, जिसके चलते राजधानी जयपुर के विभिन्न शिव मंदिरों में दिनभर धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-अर्चना का दौर जारी रहा। इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने देवाधिदेव महादेव की आराधना कर सुख-समृद्धि, आरोग्य और शत्रु बाधाओं से मुक्ति की कामना की।

संध्या समय प्रदोषकाल में मंदिर प्रांगण बम-बम भोले के जयकारों से गूंज उठे। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से शिवलिंग का जल, गंगाजल, दूध और पंचामृत से अभिषेक किया। इसके पश्चात अखंडित बेलपत्र, धतूरा, शमी पत्र, सफेद फूल और भस्म अर्पित कर धूप-दीप प्रज्वलित किए।

गुरु प्रदोष का अवसर होने के कारण विशेष रूप से भगवान शिव को पीले पुष्प, चना दाल और गुड़ अर्पित किए गए। शाम के समय शिव चालीसा व रुद्राष्टकम का पाठ कर ‘ओम नम: शिवाय’ तथा महामृत्युंजय मंत्र के जाप के साथ महाआरती की गई।

वहीं देर रात चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होने पर मासिक शिवरात्रि के निशीथ काल में भी भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान कर विशेष पूजन किया गया। मध्यरात्रि में श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर जलाभिषेक व बेलपत्र अर्पित कर मनोवांछित फल तथा सुखद वैवाहिक जीवन की पूर्ति के लिए प्रार्थना की।

व्रतधारी श्रद्धालुओं ने सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लिया और दिनभर भक्तिभाव से नियम-संयम का पालन किया। पूजा-अर्चना के उपरांत श्रद्धालुओं द्वारा मंदिरों के बाहर जरूरतमंदों को अन्न, फल और पीले वस्त्रों का दान कर पुण्य कमाया गया।

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