जयपुर। देश के प्रतिष्ठित और बहुप्रतीक्षित जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल ने अपने आगामी 20वें संस्करण के लिए वक्ताओं की पहली सूची जारी कर दी है। पाँच दिनों के खास अनुभव के साथ यह फ़ेस्टिवल एक बार फिर होटल क्लार्क्स आमेर, जयपुर में आयोजित होने जा रहा है। इस दौरान साहित्य से जुड़े दिलचस्प संवाद, अलग-अलग विषयों पर रोचक बातचीत और विभिन्न संस्कृतियों को जानने-समझने का मौका मिलेगा।
दो दशकों से लेखकों और पाठकों, विचारकों और श्रोताओं के माध्यम से भारत और दुनिया को एक साथ लाने का जश्न मनाते हुए, जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल 2027 में साहित्य, विज्ञान, पत्रकारिता, इतिहास, अर्थशास्त्र, क़ानून, तकनीक, खान-पान, फ़ैशन, संस्कृति और कला से जुड़ी आवाज़ों का एक शानदार समूह उपस्थित होगा।
अब तक घोषित वक्ताओं में अनामिका, तहमीमा अनम, उमर अल अक्काद, अवनि दोशी, स्टीव ब्रुसैट, ड्रमंड मनी-कुट्स, होमी के. भाभा, श्रबनी बसु, लुईस कैनेडी, प्रबल गुरुंग, संजॉय हज़ारिका, इसाबेला हम्माद, एस.वाई. क़ुरैशी, इंदिरा जयसिंह, बी. जयमोहन, जस्टिस संजय किशन कौल, करण महाजन, किरण मजूमदार-शॉ, दामोदर मौजो, डेम मीरा सयाल, मार्कस डू सॉटॉय, गीतांजलि श्री, मॉली क्रैबेपल, वली नस्र, एस्थर डुफ़्लो, डेविड वैन रेब्रुक, सुधा मूर्ति, ओल्गा टोकार्चुक, जेम्स वुड, लीज़ डूसे और राधावल्लभ त्रिपाठी शामिल हैं।
इस सूची में हमारे समय की कुछ सबसे अलग और प्रभावशाली साहित्यिक व बौद्धिक आवाज़ें शामिल हैं। दुनिया भर के प्रसिद्ध लेखकों और विचारकों के साथ-साथ भारत की असाधारण भाषाई और सांस्कृतिक विविधता का प्रतिनिधित्व करने वाले नाम भी इस सूची को समृद्ध कर रहे हैं। हिंदी, तमिल, मलयालम, असमिया, कोंकणी, कन्नड़, मराठी, भोजपुरी, सिंधी, मणिपुरी और अन्य भारतीय साहित्यिक परंपराओं से लेकर प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आवाज़ों तक, 20वाँ संस्करण उन तमाम भाषाओं और दृष्टिकोणों का उत्सव मनाएगा जो समकालीन साहित्य और विचारों को आकार देते हैं।
विज्ञान और बौद्धिक जगत की प्रमुख हस्तियों में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में गणित के प्रोफेसर और विज्ञान को आम लोगों तक पहुँचाने के लिए काम करने वाले मार्कस डू सॉटॉय तथा जीवाश्म विज्ञानी स्टीव ब्रुसैट शामिल हैं। इनके अलावा प्रमुख अर्थशास्त्री, शिक्षाविद और विचारक भी फ़ेस्टिवल का हिस्सा होंगे, जिनका काम हमारे समय के कुछ अहम सवालों से जुड़ा है।
फ़ेस्टिवल भारत की समृद्ध और विविध साहित्यिक परंपराओं को भी विशेष रूप से सामने लाएगा और देश की अनेक भाषाई संस्कृतियों के लेखकों को एक साथ जोड़ेगा। इस सूची में शामिल हैं राधावल्लभ त्रिपाठी, संस्कृत के प्रतिष्ठित विद्वान और लेखक; अनामिका, जानी-मानी हिंदी कवयित्री; ध्रुवज्योति बोरा, प्रशंसित असमिया लेखक; मकरंद साठे, मराठी नाटककार और लेखक; पॉल ज़कारिया, मलयालम साहित्य की अग्रणी आवाज़ों में से एक; दामोदर मौजो, प्रसिद्ध कोंकणी लेखक; वसुधेंद्र, कन्नड़ में लिखने वाले लेखक; गौतम चौबे, हिंदी और भोजपुरी के द्विभाषी लेखक; राम मोरी, प्रमुख गुजराती लेखक; और जयमोहन, तमिल और मलयालम के द्विभाषी लेखक।
हमारे समय की वैश्विक राजनीति, साम्राज्यों और प्रवासन के इतिहास से लेकर जाति, लोकतंत्र, संघर्ष, पहचान और अपनेपन के सवालों तक, जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल 2027 एक ऐसा मंच बनने के लिए तैयार है जहाँ अलग-अलग विषयों, भौगोलिक क्षेत्रों और पीढ़ियों के विचार एक-दूसरे से मिल सकें।
फ़ेस्टिवल साहित्य को अभिव्यक्ति के अन्य रूपों के साथ भी जोड़ेगा। प्रदर्शन कला, लोकप्रिय संस्कृति और फ़ैशन की दुनिया का प्रतिनिधित्व डेम मीरा सयाल और प्रबल गुरुंग करेंगे। साथ ही जादूगर और क़िस्सागो ड्रमंड मनी-कुट्स की उपस्थिति भी होगी।
टीमवर्क आर्ट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर संजॉय के. रॉय ने कहा, “बीस साल बाद भी जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल की मूल भावना वही है—सभी के लिए खुला मंच, जहां अलग-अलग विचार मिलते हैं और नई बातचीत की शुरुआत होती है। यहां बड़ी संख्या में युवा दर्शक पांच दिनों तक कला, साहित्य, संगीत, खान-पान, डिजाइन और वास्तुकला से जुड़ी विरासत का उत्सव मनाने के लिए एक साथ आते हैं।”
जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल की सह-संस्थापक और सह-निदेशक, लेखिका नमिता गोखले ने कहा, ” “पिछले दो दशकों में राजस्थान के जयपुर में एक छोटे-से फ़ेस्टिवल के रूप में शुरू हुआ यह आयोजन दुनिया के सबसे बड़े और सबसे भरोसेमंद साहित्यिक आयोजनों में से एक बन गया है। किताबों, विचारों और संवादों की इस यात्रा में हम अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों से होते हुए लगातार बदलती दुनिया के साथ आगे बढ़े हैं।
हमारे एक दर्जन से अधिक अंतरराष्ट्रीय संस्करणों ने अलग-अलग भाषाओं के साहित्यिक समुदाय और ऐसे लेखकों को एक-दूसरे से जोड़ा है, जो उदारता से अपना समय और अनुभव साझा करते हैं। हमारे निष्ठावान और सक्रिय दर्शकों ने हमें कथा और कविता के अनेक पहलुओं को तलाशने का अवसर दिया है—समकालीन से शास्त्रीय और रोज़मर्रा के जीवन से राजनीति तक। जनवरी दो मुख वाले देवता जेनस का महीना है, जो अतीत और भविष्य दोनों की ओर देखता है। आने वाली जनवरी में दुनिया एक बार फिर जयपुर आएगी और जयपुर दुनिया तक पहुँचेगा। इसी के साथ ‘धरती का सबसे बड़ा साहित्यिक आयोजन’ एक बार फिर जीवंत होगा।”
जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल के सह-निदेशक विलियम डैलरिम्पल ने कहा, “जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल के बीस साल पूरे होना एक उल्लेखनीय पड़ाव है। यह फ़ेस्टिवल एक छोटे-से साहित्यिक जमावड़े के रूप में शुरू हुआ था और आज दुनिया में साहित्य और विचारों के सबसे बड़े उत्सवों में गिना जाता है। जयपुर को ख़ास बनाती है आवाज़ों की वह असाधारण विविधता, जो यह एक जगह लेकर आता है।
इसमें स्थापित साहित्यकारों से लेकर उभरते लेखकों, वैज्ञानिकों, इतिहासकारों और कलाकारों तक की सहभागिता होती है, जो भारत व दुनिया भर के विचारों से आयोजन को समृद्ध करते हैं। यह फ़ेस्टिवल हमेशा से नई खोजों के रोमांच का मंच रहा है। यह बीसवाँ संस्करण उसी भावना का उत्सव मनाएगा और साथ ही अगले अध्याय के दरवाज़े भी खोलेगा।”
20वाँ संस्करण जयपुर को फ़ेस्टिवल के घर और दिल के रूप में भी सम्मानित करेगा। दुनिया भर के साहित्य-समुदाय को राजस्थान के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परिवेश तक लेकर जाएगा।
विचारों, कहानियों और संवादों के बीस वर्ष पूरे कर रहे जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल का ऐतिहासिक 2027 संस्करण इस असाधारण यात्रा पर नज़र डालेगा और उन आवाज़ों, सवालों और कहानियों के लिए जगह बनाएगा, जो आने वाले दशकों को आकार देंगे।



















