राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में बाल पंचकर्म के मानकीकृत प्रोटोकॉल का विमोचन

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Launch of standardized protocols for pediatric Panchakarma at the National Institute of Ayurveda
Launch of standardized protocols for pediatric Panchakarma at the National Institute of Ayurveda

जयपुर। आयुष मंत्रालय भारत सरकार के अधीन राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान मानद विश्वविद्यालय, जयपुर में छह दिवसीय सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम ‘कौमार-संभव 2026’ के चौथे दिन कौमार (बाल) पंचकर्म की मानकीकृत उपचार प्रक्रियाओं से संबंधित प्रोटोकॉल का विमोचन किया गया। संस्थान के कुलपति प्रो. संजीव शर्मा ने ‘कौमार पंचकर्म प्रोटोकॉल का मानकीकरण’ शीर्षक से तैयार दस्तावेज का विमोचन किया। इसका उद्देश्य बाल चिकित्सा में आयुर्वेदिक पंचकर्म प्रक्रियाओं को व्यवस्थित, एकरूप और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुरूप विकसित करना है।

कार्यक्रम में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, गोवा के कौमारभृत्य विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. निशा कुमारी ओझा, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. राकेश कुमार नागर तथा आयुर्वेद शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, जामनगर के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. वीरेंद्र कुमार कोरी सहित संकाय सदस्य और देश के विभिन्न राज्यों एवं संस्थानों से आए 30 प्रतिभागी उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के कौमारभृत्य विभाग की ओर से विकसित प्रोटोकॉल में शिशुओं, बच्चों और किशोरों की आयु, शारीरिक स्थिति तथा विकासात्मक आवश्यकताओं के अनुसार उपचार प्रक्रियाओं के निर्धारण पर जोर दिया गया है। इसमें रोगी का चयन, उपचार पूर्व तैयारी, औषधियों की मात्रा, चिकित्सा अवधि, आयु के अनुरूप बदलाव, सुरक्षा संबंधी सावधानियां, निषेध, उपचार के दौरान निगरानी और चिकित्सकीय परिणामों के मूल्यांकन जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल हैं।

इन प्रोटोकॉल का उद्देश्य बाल रोगियों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप उपचार संबंधी मार्गदर्शन उपलब्ध कराना, प्रक्रियाओं में एकरूपता लाना और चिकित्सकीय अभिलेखीकरण को प्रोत्साहित करना है।

कुलपति प्रो. संजीव शर्मा ने कहा कि आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों के वैज्ञानिक मानकीकरण, व्यवस्थित आंकड़ा संकलन और उचित दस्तावेजीकरण से उपचार की गुणवत्ता एवं विश्वसनीयता बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। मानकीकृत प्रोटोकॉल भविष्य में वैज्ञानिक अनुसंधान, नैदानिक अध्ययनों और प्रमाण-आधारित चिकित्सा पद्धतियों के विकास के लिए आधार उपलब्ध करा सकते हैं।

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