जयपुर। राजस्थान में देश के पहले वितरण ट्रांसफॉर्मर स्तर के सोडियम-आयन बैटरी ऊर्जा भंडारण सिस्टम का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (जेवीवीएनएल) और ग्लोबल एनर्जी अलायंस फॉर पीपल एंड प्लैनेट ने इसके लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। दोनों संस्थाओं ने जयपुर के केएल सैनी स्टेडियम में स्थापित होने वाले 250 किलोवाट क्षमता और 250 किलोवाट-घंटा ऊर्जा भंडारण वाले सिस्टम के लिए संयुक्त रूप से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं।
इस परियोजना का उद्देश्य बिजली की अधिकतम मांग के प्रबंधन, रूफटॉप सौर ऊर्जा के बेहतर उपयोग और वितरण नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने में सोडियम-आयन बैटरी की उपयोगिता का आकलन करना है। परीक्षण के दौरान राजस्थान की भीषण गर्मी सहित वास्तविक परिस्थितियों में इस तकनीक की कार्यक्षमता और विश्वसनीयता की जांच की जाएगी।
पायलट के तहत वितरण ट्रांसफॉर्मर के स्तर पर बैटरी स्थापित कर यह देखा जाएगा कि स्थानीय स्तर पर ऊर्जा भंडारण से बिजली की अधिकतम मांग कम करने, सौर ऊर्जा का बेहतर उपयोग करने और बिजली नेटवर्क के विस्तार या उन्नयन पर होने वाले खर्च को टालने में कितनी मदद मिल सकती है। सोडियम-आयन तकनीक की तुलना प्रचलित लिथियम-आयन बैटरी सहित अन्य विकल्पों से भी की जाएगी।
परीक्षण में बैटरी की तकनीकी दक्षता, सुरक्षा, तापीय व्यवहार, अत्यधिक गर्मी में प्रदर्शन और थर्मल रनअवे से जुड़े जोखिमों का आकलन होगा। इसके अलावा बैटरी के क्षरण, लागत और पूरे जीवनकाल में मिलने वाले लाभों की तुलना पारंपरिक नेटवर्क उन्नयन के विकल्प से भी की जाएगी।
समझौते के तहत जेवीवीएनएल परियोजना के लिए स्थान, समर्पित टीम और परिचालन संबंधी आंकड़े उपलब्ध कराएगा। वहीं, ग्लोबल एनर्जी अलायंस सिस्टम की रूपरेखा तैयार करने, प्रदर्शन की निगरानी और तकनीकी सहयोग के साथ जेवीवीएनएल के इंजीनियरों को प्रशिक्षण देने में मदद करेगा। परियोजना के निष्कर्षों का दस्तावेजीकरण कर अन्य बिजली वितरण कंपनियों के साथ साझा किया जाएगा।
ग्लोबल एनर्जी अलायंस की कंट्री हेड एवं भारत की उपाध्यक्ष तान्या सिंघल ने कहा कि भविष्य में बिजली ग्रिड के लिए ऊर्जा भंडारण की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। बिजली वितरण कंपनियों के पास बैटरी तकनीक के कई विश्वसनीय विकल्प होने चाहिए। राजस्थान की परिस्थितियों में वास्तविक वितरण नेटवर्क पर सोडियम-आयन बैटरी का परीक्षण कंपनियों को ठोस आंकड़ों के आधार पर निर्णय लेने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि परियोजना से मिलने वाले अनुभव देशभर की बिजली वितरण कंपनियों के साथ साझा किए जाएंगे।
यह पहल जेवीवीएनएल और ग्लोबल एनर्जी अलायंस के बीच जारी सहयोग का विस्तार है। दोनों संस्थाएं पहले भी जेवीवीएनएल के वितरण नेटवर्क की बेहतर समझ विकसित करने के लिए डिजिटल ट्विन परियोजना पर काम कर रही हैं। जेवीवीएनएल अलायंस के ‘इंडिया ग्रिड्स ऑफ द फ्यूचर एक्सेलरेटर’ के तहत चुनी गई प्रमुख बिजली वितरण कंपनियों में शामिल है। यह कार्यक्रम नेटवर्क की दक्षता बढ़ाने, अक्षय ऊर्जा को ग्रिड से जोड़ने और बढ़ती बिजली मांग के बीच भरोसेमंद आपूर्ति बनाए रखने में सहयोग करता है।
पायलट से मिलने वाले निष्कर्षों के आधार पर यह आकलन किया जा सकेगा कि भारतीय बिजली वितरण कंपनियों के लिए सोडियम-आयन बैटरी तकनीक किन परिस्थितियों में तकनीकी और व्यावसायिक रूप से उपयोगी हो सकती है। इसका उद्देश्य किसी एक बैटरी तकनीक को बेहतर घोषित करना नहीं, बल्कि वास्तविक संचालन से प्रमाण जुटाकर भविष्य में ऊर्जा भंडारण और वितरण ग्रिड के आधुनिकीकरण से जुड़े निर्णयों को मजबूत करना है।














