अम्बेडकर-फुले विचार क्रांति महोत्सव : पहचान-संविधान और आवाज पर हुआ मंथन

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जयपुर। डॉ. अम्बेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसायटी के तत्वावधान में आयोजित अंबेडकर-फुले विचार क्रांति महोत्सव के तीसरे दिन संविधान, पहचान और सामाजिक आवाज जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन मंथन हुआ। सोसायटी अध्यक्ष सत्यवीर सिंह ने बताया कि मंगलवार को अंबेडकर जयंती के अवसर पर आमसभा आयोजित कर डॉ. भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि दी जाएगी।

प्रथम सत्र ‘क्यों भुलाए दलित वीर’ में जनकथाकार रतन कुमार सांभरिया ने स्वतंत्रता संग्राम में शहादत देने वाले दलित वीरों के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने रायसिंहनगर के शहीद बीरबल सिंह सहित 35 ऐसे शहीदों का उल्लेख किया, जिनका इतिहास में पर्याप्त जिक्र नहीं मिलता।

द्वितीय सत्र ‘संविधान: कैसे बने लाइफ मैन्युअल?’ में पूर्व न्यायमूर्ति टी.सी. राहुल ने संविधान को देश की “लाइफलाइन” बताते हुए इसकी महत्ता पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने समानता, मूल अधिकार और न्याय प्रक्रिया पर चर्चा करते हुए कहा कि संविधान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सशक्त नीयत आवश्यक है।

तृतीय सत्र ‘न्यूज़रूम में दलित आवाज—मौजूद या मिसिंग?’ में मीडिया में प्रतिनिधित्व पर चर्चा हुई। क्रेडेंट टीवी के एडिटर इन चीफ सुनील एस.एल. नारनोलिया ने कहा कि पत्रकारिता में प्रभावशाली आवाज के लिए संगठित होना जरूरी है, वहीं पत्रकार एन.आर. मनोहर ने दलित मुद्दों को मीडिया में अधिक स्थान देने की जरूरत बताई।

महोत्सव के तीसरे दिन हुए इन सत्रों में सामाजिक सरोकारों, समानता और अभिव्यक्ति की मजबूती पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।

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